-हाईकोर्ट तक पहुंच रहे मामले, चुनाव की निष्पक्षता, कार्यकाल और वित्तीय पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल
- बढ़ते विवादों के चलते सोसाइटियों के विकास कार्य प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। शहर की आधा दर्जन से अधिक सोसाइटियों में अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) के गठन, चुनाव और प्रबंधन को लेकर विवाद चल रहे हैं। कई मामलों में निवासी एक-दूसरे पर चुनाव में अनियमितता, कार्यकाल पूरा होने के बाद भी पद पर बने रहने और वित्तीय पारदर्शिता नहीं रखने के आरोप लगा रहे हैं। कुछ विवाद उप रजिस्ट्रार कार्यालय से होते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच चुके हैं। इसका असर सोसाइटियों के कामकाज पर पड़ रहा है। निवासियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रबंधन और अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
एल्डिको आमंत्रण में पुराने प्रबंधन की वापसी पर विवाद
सेक्टर-119 स्थित एल्डिको आमंत्रण सोसाइटी में एओए चुनाव को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। मामले में गाजियाबाद के उप रजिस्ट्रार के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पांच सितंबर 2026 को रोक लगा दी थी। इसके बाद पुरानी एओए को सोसाइटी का दैनिक प्रबंधन संभालने का रास्ता मिला। हालांकि, इस फैसले से नाराज निवासियों ने 13 सितंबर को प्रदर्शन कर पारदर्शिता और आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई थी। निवासियों का आरोप था कि महत्वपूर्ण फैसलों में उनसे सीधे संवाद नहीं किया जा रहा है। मामले में रजिस्ट्रार निखिलेश राज की ओर से हाईकोर्ट के आदेश की प्रति संबंधित पक्षों को भेजे जाने की जानकारी भी दी गई थी।
हाइड पार्क में चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल
सेक्टर-78 स्थित हाइड पार्क सोसाइटी में भी एओए चुनाव को लेकर विवाद सामने आया। कुछ निवासियों ने चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा। 11 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव की निष्पक्षता और संबंधित आदेशों को ध्यान में रखते हुए उप रजिस्ट्रार को सदस्यों की आपत्तियों पर विचार कर कारण सहित निर्णय लेना होगा।
महागुन मॉडर्न में चुनाव और खर्चों का हिसाब मांग रहे निवासी
सेक्टर-78 स्थित महागुन मॉडर्न सोसाइटी में भी एओए के कामकाज को लेकर विरोध हुआ। निवासियों ने चुनाव प्रक्रिया, वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा पर होने वाले खर्च और रखरखाव शुल्क को लेकर सवाल उठाए। 14 सितंबर को आयोजित आम सभा में विरोध के कारण बैठक स्थगित करनी पड़ी। निवासियों ने चुनाव में पारदर्शिता और वित्तीय अभिलेखों की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की। हालांकि यह मामला भी विचाराधीन है। इसी के साथ महागुन मजेरिया सोसाइटी में भी एओए बनाए जाने वाला मामले में भी बिल्डर हाईकोर्ट चला गया था जिसमें दोबारा चुनाव करवाकर 15 दिन में हैंडओवर देने का भी फैसला लिया गया है। सेक्टर-78 स्थित गोल्फ व्यू-1 सोसाइटी में एओए के कई सदस्यों ने भी रिजाइन दे दिया है।
पारस टियारा सोसाइटी में एफआईआर
इस सोसाइटी में पूर्व और वर्तमान एओए में विवाद के बाद कई बार मामला प्रकाश में आ चुका है। इसमें जीबीएम में न बुलवाने को लेकर भी प्रदर्शन ओर वीडियो सामने आए थे। इसमें एफआईआर तक मामला पहुंच चुका है।
क्यों बढ़ रहे हैं विवाद
सोसाइटियों में एओए के गठन और चुनाव को लेकर विवादों के पीछे कार्यकाल, मतदाता सूची, मतदान के अधिकार, चुनाव अधिकारी की नियुक्ति और वित्तीय पारदर्शिता जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। कई मामलों में दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं। ऐसे में निवासियों की मांग है कि चुनाव प्रक्रिया स्पष्ट नियमों के तहत हो, वित्तीय अभिलेखों की जानकारी समय पर मिले और शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण किया जाए। विवाद लंबा खिंचने से सोसाइटी के रखरखाव, विकास कार्यों और सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया पर असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। रजिस्ट्रार कार्यालय की भूमिका ऐसे मामलों में संबंधित अभिलेखों, आपत्तियों और लागू नियमों के आधार पर कार्रवाई करने की है।
कई मामले हाईकोर्ट में भी विचाराधीन हैं। सोसाइटी में बढ़ते मामलों को हल कराने के लिए अलग से कमेटी बनवाने पर माननीय हाईकोर्ट के आदेश के बाद फैसला लिया जा सकता है। - निखिलेश रंजन, रजिस्ट्रार