ग्रेटर नोएडा। विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट की अदालत ने एक नाबालिग लड़की के अपहरण के मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। फैसले में अदालत ने कहा कि आरोपी सात साल बाद अग्रिम जमानत मांगने के लिए आया है। साथ ही वह खुद को निर्दोश साबित करने में विफल रहा है। मामला कोतवाली इकोटेक-3 में 2018 में दर्ज किया गया था।
अभियोजन के अनुसार शिकायतकर्ता की 14 वर्षीय पुत्री को आरोपी विकास के साथ एक अन्य आरोपी बबलू और शैलेंद्र बहलाकर ले गए थे। पीड़िता अपने घर से 1.50 लाख रुपये नकद, सात तोला सोना और 900 ग्राम चांदी भी ले गई थी। जांच के बाद अदालत में अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई जबकि विकास को फरार बताया गया। आरोपी के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपी ने न तो लड़की को बहलाया है और न ही उसे उसके कब्जे से उसे ढूंढा गया है। वहीं, विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि आरोपी ने लगभग सात वर्षों तक खुद को न्यायिक प्रक्रिया से दूर रखा। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पी. चिदंबरम बनाम प्रवर्तन निदेशालय (2019) के मामले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि अग्रिम जमानत केवल असाधारण मामलों में दी जा सकती है जहां आरोप निराधार हों। इस कारण अदालत ने अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। ब्यूरो