-बुखार-खांसी की शिकायत पर नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुआ था बुजुर्ग
-43 दिनों में गांव में हुई 18वीं मौत, सर्वे में दो और मरीज मिले
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। छांयसा गांव में बुधवार को एक और मौत हो गई। मृतक अहमद को बुखार आया था। इसके बाद खांसी की शिकायत हुई। उसको स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ ने नूह नलहड़ स्थित मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया था। वहां से उसको रोहतक पीजीआई के लिए रेफर कर दिया गया। रोहतक पीजीआई में दिखाकर अहमद को मंगलवार रात्रि को ही गांव में वापिस लाए थे। बुधवार को उसकी मौत हो गई।
स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय डॉक्टरों ने बताया कि अहमद बुजुर्ग था। वह दमा रोग से पीड़ित था। उसके गले एवं पेट में छाले हो गए थे। फेफड़े भी खराब हो गए थे। इस कारण उसको नूंह मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया। उसको सांस लेने में भी दिक्कत आ रही थी। पिछले 43 दिनों में गांव छांयसा में यह 18वीं मौत है। इस बीच स्वास्थ्य विभाग की टीम को सर्वेक्षण के दौरान दो और मरीज मिले। जिनमें से राजवती का इलाज मैक्स अस्पताल दिल्ली में हो रहा है। उसको भी काला पीलिया बताया गया है। एलाइजा टेस्ट कराया गया है। उसके अन्य टेस्टों के लिए सैम्पल लिए गए हैं। वहीं मंजू नामक मरीज हेपिटाइटिस सी पॉजिटिव मिली। टाइफाइड से वह ग्रस्त पाई गई। मंजू को पलवल स्थित जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
-
घर-घर सर्वेक्षण व स्क्रीनिंग का काम तेज
स्वास्थ्य विभाग का घर-घर जाकर सर्वेक्षण एवं स्क्रीनिंग का कार्य लगातार जारी है। विभाग की नौ टीमों में 22 मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर, 10 आशा वर्कर एवं कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स एवं एएनएम सहित लगभग 50 स्टाफ सदस्य घर घर जा रहे हैं। बुधवार को भी विभाग की टीमों ने 216 घरों में जाकर एक हजार 338 आबादी को कवर किया। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की ओपीड़ी में एक भी मरीज नहीं आया।
-
ग्रामीणों का वेक्सीन से भरोसा उठा
स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ का कहना है कि ग्रामीण अब विभागीय टीमों को घर के बीमार लोगों की सही जानकारी नहीं दे रहे हैं। इस कारण उन्हें अन्य माध्यमों से मरीजों की जानकारी लेनी पड़ रही है। स्थिति यह बनी हुई है कि लगातार हो रही मौतों से लोगों का विश्वास सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से उठता जा रहा है। बुधवार को भी गांव छांयसा के निवासियों ने एक भी वैक्सीन नहीं लगवाई। लोगों को वैक्सीन के प्रति विश्वास जगाने के लिए सबके सामने एक मेडिकल अफसर ने स्वयं सबसे पहले वैक्सीन लगवाई। उसके बाद एएनएम ने वैक्सीन लगवाई। इसके बावजूद एक भी ग्रामीण ने वैक्सीन नहीं लगवाई। वैक्सीन के बारे में भी लोगों के दिलो दिमाग में गलत धारणा बन गई है।
वेक्सीन के बाद भी हो गई थी आर्शीदा की मौत
मृतका आर्शीदा को स्वास्थ्य विभाग ने 24 फरवरी को हेपिटाइटिस बी के बचाव के लिए वैक्सीन लगाई थी। उसके बाद वह 28 फरवरी को बीमार हो गई। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। आर्शीदा के मौत के बाद लिए गए सैम्पलों की रिपोर्ट अभी तक विभाग को नहीं मिली है। इस कारण मौत के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल पाया है।रमजान के चलते भी रोजेदार वैक्सीन लगवाने को तैयार नहीं हो रहे हैं। एसएमओ संजय शर्मा ने लोगों से अपील की है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास रखें। वैक्सीन लगवाएं। सभी को उचित एवं सुरक्षित इलाज दिया जाएगा।