नए जोश के साथ अन्नदाता ने की साल की शुरुआत
नोएडा। किसान आंदोलन को महीनाभर पूरा हो चुका है। केंद्र सरकार और किसानों से सात दौर की बातचीत के बाद भी तल्खियां कम नहीं हुई हैं। वहीं, आंदोलन तेज होने के संकेत जरूर मिल रहे हैं। चिल्ला बॉर्डर पर एक महीने से कड़ाके की ठंड में डटे किसानों ने शुक्रवार को नए जोश और उत्साह के साथ नए साल की शुरुआत की। इस दौरान किसानों ने खीर बांटी और अलाव जला लोकगीत गाकर नववर्ष मनाया।
चिल्ला बॉर्डर पर लगे किसानों के पंडाल का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नए साल के पहले दिन धरनास्थल पर नजारा पूरी तरह बदला हुआ दिखाई दिया। किसानों की भीड़ भी पहले से ज्यादा रही। सिर्फ नोएडा ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की पश्चिमी व पूर्वी बेल्ट के किसान भी समर्थन में पहुंचे। मशहूर रागनी गायक टीकम नागर सहित अन्य कलाकारों ने किसानों का उत्साह बढ़ाने का काम किया। महीने भर बिना माइक और लाउडस्पीकर के किसानों का धरना चला, लेकिन बुधवार को बड़े-बड़े साउंड सिस्टम से दिल्ली की चौखट पर खड़े किसानों ने कृषि कानूनों की वापसी के लिए आवाज मुखर की। बॉर्डर पर किसानों की मूवमेंट बढ़ते देख पुलिस-प्रशासन हरकत में आ गया। एसीपी रजनीश वर्मा भी किसानों के बीच पहुंच गए। एलआईयू कर्मचारी भी भी पल-पल की जानकारी जुटाते रहे। वहीं, दलित प्रेरणा स्थल में लोकशक्ति गुट के धरने को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर श्यौराज सिंह ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार तीनों कानूनों को वापस नहीं लेती, धरना लगातार जारी रहेगा। 4 जनवरी की वार्ता में किसानों की मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को तेज किया जाएगा जिसकी जिम्मेदार सरकार होगी।
तल्ख तेवर को पुलिस ने फूल देकर किया नरम
किसान संगठनों की सरकार से सातवें दौर की वार्ता के बाद चिल्ला बॉर्डर पर किसानों के तेवर तल्ख होने लगे। शुक्रवार को धरनास्थल पर भी इसका असर दिखाई दिया। किसानों ने प्रदेश से लेकर केंद्र की सरकार पर जमकर तंज कसे। किसानों के बीच एसीपी रजनीश वर्मा गुलाब के फूल लेकर पहुंचे। किसान नेताओं को फूल देकर नववर्ष की शुभकामनाएं दी गई। किसान नेताओं के तेवर नरम पड़े, लेकिन थोड़ी ही देर में एक बार फिर किसान नेताओं ने दिल्ली बॉर्डर से सरकार को ललकारना शुरू कर दिया।
नहीं मानी सरकार तो छिड़ेगी महाभारत
भारतीय किसान यूनियन (भानु) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने कहा कि साल 2020 खत्म हो गया और 2021 शुरू हो गया है। साल के पहले दिन किसान केंद्र सरकार को चेतावनी देते हैं कि कृषि कानूनों को वापस लिया जाए और एमएसपी की गारंटी दी जाए। अगर सरकार नहीं मानी तो पूरे देश में महाभारत छिड़ जाएगी। सात दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन एक बार भी प्रधानमंत्री किसानों से वार्ता करने नहीं आए। इसलिए अब हमने भी तय कर लिया है कि बिना पीएम से मिले नहीं जाएंगे।