- पीएचसी में 70 व सीएचसी में हर रोज कुत्ते, बिल्ली व बंदर काटने के आ रहे हैं 30 मरीज
पीयूष गौतम
यमुना सिटी। जेवर में इन दिनों कुत्ते, बंदर और बिल्लियों के काटने की घटनाओं में भारी वृद्धि देखने को मिल रही है। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों पर इन मामलों में पीड़ितों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई है, जिससे स्वास्थ्यकर्मी और प्रशासन चिंतित है। पिछले एक महीने में एक हजार से भी अधिक लोगों को जानवरों ने काट लिया। औसतन प्रतिदिन 80 से अधिक मरीज इन जानवरों के काटने का इलाज कराने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंच रहे हैं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में प्रतिदिन औसतन 60 से 80 लोग कुत्तों के काटने के बाद इलाज के लिए आ रहे हैं। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर भी हर रोज 20 से 30 मरीज इसी तरह के मामले लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक बदलते मौसम के कारण जानवरों के मनोस्थिति पर भी असर पड़ता है। इसके कारण पशुओं में चिड़चिड़ापन आ जाना भी मामलों में बढ़ोतरी का एक कारण हो सकता है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. शर्फे जेया ने बताया कि कुत्ते के काटने के बाद बिना देर किए तुरंत नल खोलकर लगभग आधे घंटे तक जख्म वाले जगह पर साबुन से धोते रहें।
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जानवर के काटने पर क्या करें
- घाव को तुरंत साबुन और पानी से 30 मिनट तक धोएं। इससे संक्रमण का खतरा कम होता है।
- तुरंत डॉक्टर से मिलें : बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल जाएं।
- डॉक्टर की सलाह पर एंटी-रेबीज का टीका लगवाएं। टीके की कोई भी खुराक न छोड़ें।
क्या न करें
- घाव को कसकर पट्टी से न ढकें। उसे खुला रहने दें ताकि हवा लगती रहे।
- एंटीसेप्टिक न लगाएं : घाव को धोने के बाद उस पर कोई भी एंटीसेप्टिक क्रीम न लगाएं।
- बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न खाएं, स्थिति बिगड़ सकती है।
- किसी भी तरह के अंधविश्वास जैसे झाड़-फूंक पर भरोसा न करें।
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वर्जन
एनिमल बाइट के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्टॉक में एंटी रेबिज के पर्याप्त टीके मौजूद हैं।
- शर्फे जेयां, चिकित्सा अधीक्षक