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एंबुलेंस चालक ने 12 किमी का 8000 और 28 किमी के 15 हजार वसूले

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नोएडा। जिला प्रशासन के तमाम निर्देशों के बाद भी एंबुलेंस चालकों की मनमानी जारी है। एंबुलेंस चालक जरूरतमंद लोगों से कई गुना कीमत वसूल रहे हैं। एक युवक ने ट्विटर पर शिकायत की है कि बृहस्पतिवार को एक एंबुलेंस चालक ने 12 किमी के 8000 और 28 किमी के लिए 15000 रुपये वसूले हैं। नोएडा ट्रैफिक पुलिस मामले की जांच कर रही है। राहुल श्रीवास्तव ने ट्विटर पर शिकायत की है कि इंदिरापुरम से नोएडा सेक्टर-33 प्रकाश अस्पताल तक के लिए निजी एंबुलेंस चालक ने 8000 रुपये का चार्ज लिया है। इसकी दूरी करीब 12 किमी है। इसके बाद सेक्टर-33 प्रकाश अस्पताल से ग्रेटर नोएडा प्रकाश अस्पताल के लिए 15000 रुपये ले लिए। इसकी दूरी करीब 28 किमी है।
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ट्विटर पर लिखा है कि एंबुलेंस चालकों की मनमानी जारी है। उन्होंने नोएडा पुलिस और नोएडा ट्रैफिक पुलिस को टैग किया है। इसके बाद नोएडा ट्रैफिक पुलिस की तरफ से ट्विटर पर जवाब दिया गया कि मामले की पूरी जानकारी दें। जांच कर कार्रवाई की जाएगी। 2 दिन पहले नोएडा ट्रैफिक पुलिस ने ऐसे ही एक मामले में कार्रवाई करते हुए एक एंबुलेंस चालक से 40 हजार रुपये वापस दिलवाए थे। डीसीपी ट्रैफिक गणेश प्रसाद साहा कहना है कि एंबुलेंस चालकों की मनमानी की शिकायत हेल्पलाइन नंबर और 112 पर दें। ऐसे एंबुलेंस चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एक घंटे की वेंटिंग का 4000 रुपये वसूल रहे
एंबुलेंस चालकों की मनमानी निरंतर बढ़ती जा रही है। वे वेटिंग का भी किराया ले रहे हैं। सेक्टर-94 स्थित अंतिम निवास में रोजाना ऐसे मामले देखने को मिल रहे हैं। एंबुलेंस चालक लोगों से एक घंटे की वेटिंग के करीब 4000 रुपये मांगते हैं। किराया नहीं देने पर पुलिस को गलत सूचना देने का दबाव बनाते हैं। सेक्टर-61 निवासी महिला के पति की कोरोना से मौत हो गई। वह एंबुलेंस से शव को लेकर अंतिम निवास पहुंची। यहां अंतिम संस्कार में दो घंटे लग गए। इस दौरान शव एंबुलेंस में रखा रहा। अंतिम संस्कार के बाद एंबुलेंस चालक ने महिला से 16 हजार रुपये वेटिंग किराये के तौर पर मांगे।
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महिला ने कहा कि जब 9000 रुपये किराए तय होने की बात कही तो चालक ने जवाब दिया कि वह शव लेकर दो घंटे खड़ा रहा। 7000 रुपये वेटिंग के मांग रहे हैं। उसने कहा कि इन दो घंटे में वह एक चक्कर लगाकर सात-आठ हजार रुपये कमा लेता। महिला ने रुपये देने से इनकार किया तो चालक ने पुलिस किराया नहीं देने की शिकायत कर दी। अंत में अंतिम निवास का संचालन कर रही संस्था के सदस्यों ने हस्तक्षेप करके मामले को निपटाया।
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