विधानसभा परिसर में महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर चित्रकला प्रतियोगिता
दिव्यांग छात्रों ने बाबा साहब के जीवन और उनके आदर्शों को रंगों से उकेरा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
‘बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने समाज को ज्ञान का अमृत दिया और स्वयं अपमान का जहर पीते गए। बाबा साहब के संघर्षों से हमें सीखना चाहिए कि जीवन एक दौड़ है। यदि हम बिना थके चलते रहे, तो एक दिन मंजिल जरूर मिलती है। उनका जीवन समाज को संघर्ष, धैर्य और आत्मबल का पाठ पढ़ाता है।’ शुक्रवार को ये बातें विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहीं। महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के मौके पर दिल्ली विधानसभा परिसर में दिव्यांग बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित हुई। इस मौके पर दिव्यांग बच्चों ने बाबा साहब के जीवन और आदर्शों को रंगों से उकेरा।
कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता मुख्य अतिथि और अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग मंत्री रविन्द्र सिंह इन्द्राज विशिष्ट अतिथि रहे। दोनों ने महात्मा ज्योतिबा फुले व बाबा साहब भीमराव आंबेडकर को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि यह आयोजन रचनात्मक क्रियाकलाप भर नहीं, बल्कि बाबा साहब के विचारों को आत्मसात करने का मौका है। बाबा साहब का योगदान केवल संविधान निर्माता के रूप में नहीं, एक क्रांतिकारी समाज सुधारक के रूप में अमूल्य है। उनके विचार हर बदलाव, हर आंदोलन में जीवंत हैं। एक रेखाचित्र हजार शब्दों से अधिक असरदार होता है। दिव्यांगों ने रंगों के जरिये बाबा साहब के विचारों को जीवंत किया।
इधर, रविन्द्र सिंह ने कहा कि 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती है, जिसे सेवा सप्ताह के रूप में मनाएं। विधानसभा में पीएम नरेंद्र मोदी के विचारों और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय को आगे बढ़ाते हुए दिव्यांग बच्चों के लिए स्केच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों की प्रतिभा उभरकर सामने आई। यह आयोजन बाबा साहब के जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर रहा।