अमर उजाला माय ज्योतिष महाकुंभ में बोले ज्योतिषाचार्यों
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ज्योतिष भारत रत्न से सम्मानित ज्योतिषाचार्य एके दुबे पद्मेश का मानना है कि ज्योतिष के खिलाफ इस तरह का वातावरण था कि कई नामचीन शख्सियतों की इसमें पहचान ही खो गई।
ज्योतिष महाकुंभ में मंच से उन्होंने बताया कि साहित्यकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मूलरूप से ज्योतिषाचार्य थे। पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन में उनकी नियुक्ति ज्योतिष पढ़ाने के लिए हुई थी लेकिन देश में ज्योतिष के खिलाफ गंभीर वातावरण था। ऐसे में उनकी पहचान खो गई। देश ने उन्हें ज्योतिषाचार्य नहीं, साहित्यकार के रूप में जाना। इसी तरह महामना पंडित मदन मोहन मालवीय भी ज्योतिष परिवार से जुड़े थे। उन्होंने ही भारतीय ज्योतिष परिषद की स्थापना की थी। महाराष्ट्र का बड़ा नाम बाल गंगाधर तिलक भी ज्योतिष का काम करते थे। आज भी कालगणना का पंचांग देश ही नहीं, दुनिया की किसी भी विधा से अधिक बिक्री वाला होता है। ज्योतिष दुनिया की रगों-रगों में है। दशकों से देश में इस विद्या का अभ्यास हो रहा है, लेकिन लोगों के बीच नकारात्मक धारणा भी पनपी है। ज्योतिषशास्त्र का अभ्यास करने वाले लोगों ने लंबा संघर्ष किया है।
विकृतियां हैं लेकिन बाढ़ में सब बह जाएंगे
पद्मेश ने कहा कि विकृतियां जब आती हैं तो सभी वर्गों में आती हैं। नेता-मंत्री पत्रकार भी जेल जाते हैं। हमारे यहां भी विकृतियां आई हैं लेकिन कालजयी तब होता है जब बाढ़ आती है। जिनकी जड़ें मजबूत नहीं होती हैं वे स्वत: ही बह जाते हैं। ऐसे तत्वों की चिंता न करें। आप अपने प्रयास करें। ये प्रयास अमरत्व को प्राप्त होने वाले हैं। इस दौरान उन्होंने अमर उजाला के प्रयास की तारीफ भी की।
ज्योतिषाचार्य को पलायनवादी नहीं, आत्मविश्वास से भरा होना चाहिए
एके दुबे पद्मेश का मानना है कि ज्योतिषाचार्य को किसी भी कीमत पर पलायनवादी नहीं आत्मविश्वास से भरा होना चाहिए। उन्होंने एक टीवी चैनल के लाइव कार्यक्रम का जिक्र किया। बकौल पद्मेश, उस समय यूपी में चुनाव हो रहा था। सवाल मुख्यमंत्री किसके बनने का आया? जवाब में मायावती सुनने के बाद सवाल उठा कि ये सभी को पता है। इसमें ज्योतिष की क्या खासियत है। इस पर कुछ पल की गणना करने के बाद बताया कि मायावती 13 तारीख को ठीक 13 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी। अगले दिन नतीजों की घोषणा हुई और 11 तारीख को शपथ ग्रहण की खबर आई। फिर लोगों ने पूछा क्या गणना गलत है? इस पर पद्मेश ने कहा कि ज्योतिषाचार्य को पलायनवादी नहीं, आत्मविश्वास से भरा होना चाहिए। गणना करने वाले ने फिर दोहराया कि शपथ ग्रहण 13 तारीख को ही होगी और ऐसा ही हुआ। इसी तरह एक दूसरे किस्से का जिक्र करते हुए पद्मेश ने बताया कि बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता। मैंने कुंडली देखकर कहा, ‘ये मरी हुई कुंडली है। आपको बच्चे को ऊपर जाकर पढ़ाना पड़ेगा। यहां पढ़ नहीं सकता’ और हकीकत में जो कुंडली थी, वह इस दुनिया में नहीं था।
वाल्मीकि रामायण के आधार पर राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने की बात
देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जिक्र करते हुए एके दुबे पद्मेश ने बताया कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद लोगों ने सवाल किया कि आगे क्या होगा? इस पर उन्होंने कुंडली का विश्लेषण कर राजीव गांधी के लिए कहा कि उन्हें 41 साल की आयु में ऐसा पद मिलेगा जो उससे पहले कभी नहीं मिला। बाद में वे पीएम बने। यह वाल्मीकि रामायण की ही देन थी इसलिए वैदिक ज्योतिष का अभ्यास करने वाले लोगों के लिए जरूरी है कि किस लग्न में कौन से ग्रह महत्वपूर्ण हैं। ग्रहों का आपस में क्या रिश्ता है। क्या कारक हैं। इन पहलुओं का अध्ययन जरूर करें। देशकाल और परिस्थितियों के आधार पर परिवर्तन होते हैं जिसकी गणना से सटीक परिणाम मिलते हैं।
श्रीराम की कुंडली का विश्लेषण, विवाह के 14 साल बाद वनवास
भगवान श्रीराम के जन्म के बाद उनकी कुंडली के विश्लेषण का जिक्र करते हुए ज्योतिषाचार्य एके दुबे पद्मेश ने बताया कि वाल्मीकि रामायण का अध्ययन करने वाले लोग इसे जानते हैं। कर्क लग्न में जन्म मंगलकारक होता है। इसके बाद 28 साल की आयु में उनका विवाह हुआ। विवाह के बाद सीधा वनवास हो गया, ऐसा नहीं है। 14वें साल वनवास होता है। कहते हैं कि 41 वर्ष में परिवर्तन होगा उसके बाद लाभ मिलेगा। श्रीराम की कुंडली में 41 वर्ष की आयु से पहले राजयोग था ही नहीं इसलिए वे करीब 56 साल की आयु होने पर ही राजा बने। श्रीराम का राजा होना महत्वपूर्ण नहीं था। अगर से समय से पहले राजा बनते तो आज मर्यादा पुरुषोत्तम का आदर्श हमारे सामने नहीं होता।
शास्त्रीय ज्ञान को पूरी दुनिया तक पहुंचाना आयोजन का मकसद
अमर उजाला डिजिटल के प्रमुख एवं संपादक जयदीप कर्णिक ने आयोजन के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि ज्योतिष महाकुंभ का मकसद भारत के शास्त्रीय ज्ञान को पूरी दुनिया तक पहुंचाना है। खबरों की भीड़ में ज्योतिषशास्त्र की अहमियत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इस विद्या की अहमियत को पहचानते हुए अमर उजाला ने माय ज्योतिष और जीवांजलि जैसे प्रकल्पों की शुरुआत की। इन दोनों वेबसाइट्स व मोबाइल एप का मकसद दर्शकों-पाठकों को व्यावसायिकता व विकारों से परे ज्योतिष और धर्मशास्त्र से जुड़ी प्रामाणिक तथ्यात्मक सूचनाएं मुहैया कराना है। उन्होंने इस आयोजन में सहयोग करने के लिए ज्योतिषाचार्यों का आभार भी प्रकट किया।
आगाज में दिखी सनातन संस्कृति की झलक
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, स्वस्तिवाचन व सरस्वती वंदना के साथ हुई। इसमें सनातन संस्कृति की झलक भी दिखी। संवाद का सिलसिला शुरू होने से पहले ज्ञान और विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की वंदना कर लोकमंगल की कामना की गई।