बीएचयू के अर्थशास्त्र विभाग में पूर्व छात्र सम्मेलन में 1960 से 2024 तक के छात्र जुटे। पुरातन छात्रों ने विश्वविद्यालय में छात्र जीवन की अपने अनुभवों को साझा किया। इस दौरान वर्तमान छात्रों के साथ संवाद में पुरातन छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय के गौरवशाली परंपरा को बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। इस दिशा में एकजुट होकर प्रयास करना होगा।
विश्वविद्यालय में पढ़कर निकले छात्र अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। लंबे समय बाद दोस्तों से मिलकर पुरातन छात्र बहुत उत्साहित दिखे। कोई आईएएस, पीसीएस तो कोई शिक्षा जगत में सेवा दे रहा है। विभागाध्यक्ष प्रो. मृत्युंजय मिश्रा ने पुरातन छात्रों को अहम कड़ी बताते हुए कहा कि समय-समय पर इस तरह के आयोजन से वर्तमान छात्रों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। कार्यक्रम का संचालन प्रो. अनूप मिश्रा, अध्यक्षता प्रो. बीवी सिंह ने किया। उधर विभाग में 1964 में शिक्षक रहे आर सुब्रमण्यम की स्मृति में हुए व्याख्यान में साउथ एशिया विश्वविद्यालय के प्रो अरूप मित्रा ने ऊर्जा संसाधनों तक पहुंच में मौजूदा वैश्विक और क्षेत्रीय असमानताओं पर बातचीत की। कहा कि ऊर्जा तक समान पहुंच, सतत विकास और सामाजिक न्याय के लिए जरूरी है।