जींद। किशनपुरा के ग्रामीणों ने शहीद महावीर सिंह राजकीय माध्यमिक विद्यालय में चल रहे विकास कार्यों में फर्जीवाड़े के आरोप लगाए हैं। वहीं उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की है। ग्रामीणों ने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रोहताश वर्मा के माध्यम से शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर स्कूल के मुख्याध्यापक की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
पूर्व सरपंच सतबीर यादव, पूर्व सरपंच बलबीर शर्मा, सतपाल उर्फ पाला, बलबीर सिंह, गोविंद ने शिक्षा मंत्री को भेज ज्ञापन में अपने आरोपों में कहा है कि विद्यालय मुखिया की कार्यशैली से अधिकतर स्कूल का स्टाफ और छात्र अभिभावक तंग है।
मुख्याध्यापक बिना किसी को विश्वास में लेकर यह कार्य सिरे चढ़ा रहे है। ऐसा पत्राचार स्कूल प्रबंध कमेटी व पचांयत भी कर चुकी है। मुख्याध्यापक का तबादला हो गया था लेकिन अधिकारियों ने उसे जब तक रिलीव नहीं किया, तब तक उसे स्टे नहीं मिल गया।
मुख्याध्यापक मनमाने फैसले लेते हैं। इसका एक उदाहरण है कि जीएमएस के अनुरोध पर जीपीएस की मेजर रिपेयर ग्रांट मंगाई गई है। इसकी वास्तव में विद्यालय को जरूरत ही नहीं थी। इसके लिए न तो प्राथमिक विद्यालय से पूछा गया और न ही विद्यालय के यू डॉइस सर्टिफिकेट को आधार माना गया।
यह स्कूल मुख्यमंत्री सुंदरीकरण प्रतियोगिता में खंड स्तर पर प्रथम रहा था। इसके बावजूद मेजर रिपेयर की आवश्यकता किस आधार पर पड़ी। इसी सत्र के दौरान स्कूल में लाखों की मिट्टी डलवाई गई जबकि 2022-23 में गांव में तालाब की खुदवाई के दौरान ग्रामीणों ने विद्यालय में मिट्टी डाल दी थी।
अब विद्यालय में मिट्टी की कोई जरूरत नहीं थी तो फिर 22 लाख से अधिक की मिट्टी का एस्टीमेट किस आधार पर बनाया गया। गांव के लोगों के सामने मुख्याध्यापक कह चुके है कि मिट्टी की ग्रांट तो सरकार ने बंद की हुई है।
ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के अधिकारी एक स्कूल के मुख्याध्यापक की जांच करने के लिए दूसरे स्कूल के मुख्याध्यापकों को भेज देते हैं। इस जांच को भी ग्रामीणों ने गलत बताया।
उन्होंने कहा कि विद्यालय मुखिया अपने पद और आदेश पुस्तिका का गलत प्रयोग करते हुए राजकीय प्राथमिक पाठशाला किशनपुरा की वार्षिक ग्रांट में अपनी घोषित-अघोषित फर्म से अपने ही गांव से ईंटों के फर्जी बिल लगाकर पैसे वसूल रहे हैं जबकि ईंटें गांव से मनरेगा मजदूरों ने एकत्रित की थी।
उन्होंने कहा कि स्कूल मुखिया कार्यकाल की विभाग के अलावा किसी दूसरी एजेंसी से जांच करवाई जाए ताकि सरकारी पैसे की बर्बादी करने वाले को जेल भेजा जा सके।