परमजीत सिंह सरना व मनजीत सिंह जीके ने सवाल उठाते हुए आरोप लगाए
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के आम चुनाव को लेकर सियासत गरमा गई है। शिरोमणि अकाली दल की कमेटी के पूर्व अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना व मनजीत सिंह जीके ने कमेटी के अध्यक्ष और महासचिव पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि वे सरकारी संरक्षण में लोकतांत्रिक व्यवस्था को ठेंगा दिखा रहे हैं। दिल्ली सरकार के अधीन काम करने वाले गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय ने उपराज्यपाल की मिलीभगत से सिख प्रतिनिधित्व को कमजोर करने की चाल चली है।
पार्टी कार्यालय में शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में सरना व जीके ने आरोप लगाया कि लॉटरी के माध्यम से सिंह सभाओं से चुने गए सदस्यों की सदस्यता को रद्द कर उनके स्थान पर सरकार के खास लोगों को नामित कर दिया गया है। उन्होंने इस निर्णय की तुलना उस दौर से की जब कालका-काहलों की जोड़ी ने पुलिस और प्रशासन की मदद से दिल्ली कमेटी पर जबरन कब्जा जमाया था। इस बार अदालत की प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए सरकार की मिलीभगत से अदालत से बाहर ही फैसले थोपे जा रहे हैं। जब मलकीत सिंह और कश्मीर सिंह ने कोर्ट में रिट दायर की थी, तब यही चुनाव आयोग हाईकोर्ट में उस याचिका का विरोध कर रहा था, लेकिन अब सत्ता के दबाव में अदालत को दरकिनार कर निर्णय सुनाया गया, जो न्याय व्यवस्था का अपमान है। सरना ने चेतावनी दी कि संगत अब इनकी लूट-खसोट और पंथ-विरोधी मानसिकता को समझ चुकी है और आने वाले चुनावों में इन्हें जवाब देने के लिए तैयार है। वहीं, जीके ने भी तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि दिल्ली कमेटी का मौजूदा नेतृत्व एक नाकाम प्रबंधन की मिसाल बन चुका है। उसने पहले धन और नौकरियों का लालच देकर हमारे लोगों को तोड़ने की कोशिश की, अब सरकारी ताकत का इस्तेमाल कर रहे हैं।