यूपी विधानमंडल सत्र में बुधवार को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और नेता प्रतिपक्ष अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच तीखी बहस हुई। मामला इतना ज्यादा बढ़ गया कि फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हस्तक्षेप करना पड़ा। उसके बाद से ही दोनों ही पक्षों से इस पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। विधानसभा में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर अभद्र भाषा का प्रयोग करने को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया की भाजपाइयों ने निंदा की। आइए दस प्वाइंट में जानते हैं कि आखिर क्या हुआ था उस दिन-
- उत्तर प्रदेश विधानसभी में बजट सत्र की शुरुआत पर सभी दल अपना पक्ष रख रहे थे।
- उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य बोल विधानसभा में अपना भाषण दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश पर तंज कसते हुए कहा कि आप जो एक्सप्रेस वे और मेट्रो बनाने की बात करते हैं ऐसा लगता है कि जैसे आपने सैफई की जमीन बेचकर ये सारा निर्माण करवाया हो।
- इस बात को लेकर अखिलेश यादव बिफर पड़े और सदन में हंगामा होने लगा।
- इसके बाद अखिलेश की ओर से इस पर उनके पिता को लेकर टिप्पणी की गई।
- इस बीच अराजकता बढ़ती देख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हस्तक्षेप किया और सदन के सदस्यों से मर्यादा बनाए रखने का अनुरोध किया।
- इसके बाद मामला शांत हुआ लेकिन केशव प्रसाद मौर्य ने विधान सभी से बाहर निकलकर अपने पिता का अपमान बताया।
- समाजवादी पार्टी ने वहीं इसे अखिलेस का अपमाना बताया और केशव प्रसाद मौर्य पर निशाना साधा।
- वहीं दूसरी ओर भाजपाई बोले- प्रदेश में केशव मौर्य को पिछड़ों का नेता मानने से बौखला गए हैं अखिलेश।
- समाजवादी पार्टी के नेताओ ने कहा कि अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली सरकार के शासन में जिस तरह वारदात और महिला अपराध बढ़े हैं उसकी कोई कल्पना नहीं की जा सकती।
- इस पर भाजपा की प्रतिक्रिया आई और उन्होंने कहा कि पार्टी गुंडों की गुंडई समाप्त कर रही है तो ऐसे में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को बर्दाश्त नहीं हो पा रहा है और वह स्वयं छटपटाहट में सदन की गरिमा का भी ध्यान न रखते हुए गुंडई की भाषा बोल रहे हैं।