बलिया। दीपावली के बाद जिले की हवा प्रदूषित हो गई। दीपावली की सुबह करीब दस बजे तक धुंध रही। इससे लोगों को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम की जानकारी देने वाली एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार बलिया में 19 अक्तूबर को वायु गुणवत्ता एक्यूआई 147 था। जबकि दीपावली के एक दिन बाद एक्यूआई 168 हो गया। 21 एवं 22 अक्तूबर को एक्यूआई क्रमश: 171 एवं 181 पर पहुंच गया।
पर्यावरणविद् डाॅ. गणेश पाठक ने बताया कि जिस तरह जिले में वायु गुणवत्ता सूचकांक स्वास्थ्य के लिए मान्य स्तर से काफी अधिक हो रहा है। यह स्थिति ख़ासतौर से बुजुर्गों एवं बच्चों के लिए घातक है। इसमें धीरे धीरे एक - दो दिनों में सुधार होने की संभावना है। स्मॉग से आंखों में जलन, सांस संबंधी परेशानियां, फेफड़ों में संक्रमण, घबराहट, सिरदर्द, तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और त्वचा संबंधी बीमारियां बढ़ने की संभावना है। हालांकि, अभी मरीजों की संख्या अस्पतालों में नहीं बढ़ी है।
दीपावली के दिन या अन्य दिन भी जो पटाखे जलाने से सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन, मोनो आक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड के साथ ही साथ वायु में सूक्ष्म कण ( पी एम 2.5 एवं पी एम 10) तथा भारी धातुएं, जैसे- कैडमियम, एल्यूमिनियम एवं मैगजीन का भी उत्सर्जन होता है, जो अंतत: वायु की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। पटाखों के जलाने से उत्पन्न दूषित गैसों एवं धूलि कणों से वायुमंडल का वातावरण धुंधला हो जाता है और यह धुंधलापन वातावरण में निचले स्तर तक आ जाता है, जिससे दृश्यता भी प्रभावित होती है। 50 - 100 एक्यूआई वाली वायु सामान्य तौर पर मान्य है। 100 - 150 एक्यूआई वाली वायु हानिकारक स्तर की हो जाती है।