नूंह। जिले को बने 15 साल से अधिक समय हो गया है। लेकिन, अब तक कृषि विभाग को अपना कार्यालय नहीं मिल सका है। स्थिति यह है कि पुराने एसडीएम ऑफिस में कृषि उपनिदेशक कार्यालय चल रहा है। भवन की हालत भी काफी जर्जर है। हालांकि विभाग के पास नई सब्जी मंडी और मेडिकल रोड पर करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन भी है। जिसकी चारदीवारी के लिए भी बजट आ चुका है, लेकिन आज तक कार्यालय नहीं बनाया गया।
कई साल पहले नई सब्जी मंडी और मेडिकल रोड पर जमीन की बाउंड्री के लिए 57 लाख रुपये पीडब्ल्यूडी के पास आ चुके हैं। लेकिन कार्यालय बनाने के संबंध में कोई प्रयास नहीं किया गया। जिला प्रशासन और विभाग की इस कार्यशैली से किसानों के साथ ही विभागीय कर्मचारियों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। जर्जर भवन के कारण हर समय हादसे का डर बना रहता है। जिला कृषि विभाग कार्यालय जिला सचिवालय में भी चलाया गया था, लेकिन दो साल पहले वहां से जिला पुराने एसडीएम ऑफिस और महिला थाना परिसर में शिफ्ट कर दिया गया। लोगों का कहना है कि यहां के अधिकारियों के अलावा जिला प्रशासन भी जिला कार्यालय बनाने में कोई रुचि नहीं ले रहा है। हाजी अली मोहम्मद खेड़ला, जाकिर कोटला, समय सिंह किरा और सुरेंद्र सिंह छपेड़ा ने बताया कि एक जगह पर कार्यालय नहीं होने से किसानों को इधर-उधर भटकना पड़ता है। पुन्हाना, तावडू, फिरोजपुर झिरका और नगीना सहित अन्य क्षेत्रों से आने वाले किसानों को सबसे अधिक परेशानी होती है।
वर्जन-
प्रशासन को किसानों के हितों को ध्यान में रखकर इस समस्या का समाधान कराना चाहिए। विभाग के पास अपना कार्यालय होगा तो अधिकारियों को भी काम करने में आसानी होगी। - साबिर, सरपंच मालब
सरकार किसानों की हितैषी बनने के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं है। निश्चित ही यह जिले में बड़ी समस्या है। - खलील अहमद, अधिवक्ता
सरकार और प्रशासन को इस बारे में सोचने की जरूरत है। अगर विभाग को कार्यालय मिलता है तो किसानों की काफी सुविधा रहेगी। - अख्तर चंदेनी, किसान
विभाग द्वारा उच्चाधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया गया है। जिला कार्यालय नहीं होने से अधिकारियों और कर्मचारियों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। समस्या के जल्द समाधान होने की उम्मीद है। - डॉ. अजीत सिंह, एसडीओ, कृषि विभाग नूंह