कुमारगंज। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय ने फल व मसाले की तीन प्रजातियां विकसित की है। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. बिजेंद्र सिंह के मार्ग दर्शन में यह सभी प्रजातियां उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय ने विकसित की हैं। भारत सरकार के कृषि एवं कल्याण मंत्रालय ने इन प्रजातियों की पहचान एवं अधिसूचना जारी कर दी है। विकसित होने वाली प्रजातियों में नरेंद्र बेल -17, नरेंद्र बेर-2 एवं नरेंद्र हल्दी-5 शामिल हैं।
उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. भगवानदीन ने इन प्रजातियों को विकसित करने में लगे हुए लोगों को बधाई देते हुए विश्वविद्यालय के लिए बड़ी उपलब्धि बताई। बेल एवं बेर की प्रजातियों को विकसित करने में वरिष्ठ वैज्ञानिक/कुलपति डाॅ. बिजेंद्र सिंह, डाॅ. आरके पाठक, डाॅ. एचके सिंह, डाॅ. भानुप्रताप, डाॅ. रत्नाकर दिवेदी, डाॅ. संजय पाठक, नंदलाल शर्मा, एके श्रीवास्तव आदि शामिल हैं।
यह हैं विकसित प्रजातियों की विशेषताएं
नरेंद्र बेल- 17
इसके फल का आकार थोड़ा लंबोतर गोल, फल की सतह चिकनी, फल का वजन दो से 2.25 किलोग्राम, फल परिपक्वता के समय हरा पीला एवं गुदे का रंग हल्का पीला होता है। पके हुए फल के गुदे में मीठापन (टी. एस. एस.) 35-38 ब्रिक्स/100 ग्राम गूदे में पाया जाता है। यह मुरब्बा, जूस, कैंडी आदि के लिए अत्यधिक उपयुक्त है। यह प्रजाति तीन से चार वर्ष में ही फल देना शुरू कर देती है।
नरेंद्र बेर-दो
यह प्रजाति अधिक उत्पादन क्षमता वाली है। इस फल का वजन लगभग 40-45 ग्राम तक होता है। फल का आकार गोल और पकने पर हरा पीला होता है। फल के गूदे का रंग सफेद होता है। फल में मीठापन 13 से 14 ब्रिक्स/100 ग्राम गूदे में पाया जाता है। एक पौधे से उपज 100 से 120 किलोग्राम तक पाया गया है।
नरेंद्र हल्दी-5
यह प्रजाति अधिक उत्पादन क्षमता वाली और उपज 350 से 370 क्विंटल है, कंद बड़े आकार का, कुरकुमिन 4.3 से 5.2 प्रतिशत, शुष्क कंद प्राप्ति 70 से 75 क्विंटल और पत्ती धब्बे रोग के प्रति मध्यम अवरोधी प्रजाति है।
49-kकृषि विवि में विकसित बेल की प्रजाति