फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पूजा स्थल के बहाने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण रोकने के लिए एजेंसियां बाध्य: हाईकोर्ट

विज्ञापन
विज्ञापन
नई दिल्ली। सरकारी जमीन पर पूजा स्थल के बहाने होने वाले अतिक्रमण को रोकने के लिए डीडीए समेत सरकारी एजेंसियां बाध्य हैं। हाईकोर्ट ने सरकारी जमीन पर पूजा स्थल के नाम पर होने वाले अतिक्रमण पर चिंता जाहिर करते हुए उक्त टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि ज्यादातर मामलों में गलत लोग मंदिर या दूसरे पूजा स्थल बनाकर सरकारी जमीन पर स्वामित्व का दावा करते हैं।
विज्ञापन

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि पूजा स्थल के नाम पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को हतोत्साहित किया जाना चाहिए। इससे सैंकड़ों लोग सरकारी जमीन पर कब्जा करते हैं। ऐसे मामलों में सरकारी एजेंसियां ये तय करने के लिए बाध्य हैं कि इसकी आड़ में सरकारी जमीन पर कब्जा न हो। इससे भी ज्यादा इस याचिका के कारण एक प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है। यह पूरी तरह जनहित के विपरीत है।
हाईकोर्ट ने संबंधित याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस परिपाटी पर सुप्रीम कोर्ट कई बार नाराजगी जता चुका है। इस याचिका में न्यू पटेल नगर के नजदीक बने चार मंदिरों को न ढहाने का निर्देश डीडीए को देने का आग्रह किया गया था। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए याची पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। हाईकोर्ट ने जुर्माना राशि हाईकोर्ट लीगल ऐड सोसाइटी में जमा कराने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने कहा यह सरकारी जमीन है और याची का इस पर कोई अधिकार नहीं है। पेश याचिका खुद को स्वामी ओंकारा नंद का शिष्य बताने वाले शख्स ने दायर की थी। उसका कहना था कि वह लंबे समय से इन मंदिरों का संचालन व प्रबंधन कर रहा है। उसका कहना था कि ये मंदिर 1960 से उसी जमीन हैं और वह ओंकारा नंद की मृत्यु के बाद 1982 से मंदिरों का प्रबंधन कर रहा है।
वहीं डीडीए का कहना था कि ये मंदिर सरकारी जमीन पर बने हैं और याची ने उस पर अवैध कब्जा कर रखा है। ये जमीन 1982 में कठपुतली कालोनी के लोगों के पुनर्वास के लिए दी गई थी। - एजेंसी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें