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Noida News: दिवाली के बाद बंद हो जाता है लहसुन और प्याज फिर करते हैं सात्विक भोजन

Sun, 26 Oct 2025 01:49 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
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रूबि। स्रोत : स्वयं
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संवाद न्यूज एजेंसी
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पानीपत। छठ महापर्व आस्था से जुड़ा है। महिलाओं के साथ पुरुष भी इस व्रत को रखते हैं। इन सबके बीच महिलाओं की संख्या अधिक रहती है। व्रती दिवाली के बाद लहसुन और प्याज खाना बंद कर देते हैं। वे इन दिनों सात्विक भोजन करते हैं। पहले दिन नहाय और खाए होता है। खरना के बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास करते हैं। पूर्वांचल की महिलाओं ने छह महापर्व पर अपनी आस्था और विश्वास पर बात की।
परिवार में है सुख-शांति
मैं मूलरूप से बिहार के गया जिले की रहने वाली हूं। पिछले 30 साल से विकास नगर में अपने परिवार के साथ रह रही हूं। यहीं पर 15 साल से छठ महापर्व धूमधाम से मना रहे हैं। छठ मैया के आशीर्वाद से परिवार में सुख-शांति बनी हुई है। पूर्वांचल समाज में छठ पर्व को महापर्व के रूप में मनाया जाता है। चार दिवसीय पर्व में छठ मैया की संतान की सुख-समृद्धि, दीर्घायु के लिए पूजा जाता है और सूर्य देव को पुत्र प्राप्ति के लिए अर्घ्य दिया जाता है। इस दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। नहाय-खाय और खरना के दिन भोजन करते समय बोलने का विशेष ध्यान रखते हैं। जब भोजन करते हैं तो घर में कोई भी आवाज नहीं होती है यदि उस समय आवाज हो जाए तो भोजन करना उसी समय बंद कर दिया जाता है।
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रूबि, विकास नगर।
घर की साफ-सफाई का रखते हैं विशेष ध्यान
मैं बिहार के औरंगाबाद की रहने वाली हूं। पिछले 21 साल से गोपाल कॉलोनी में रह रही हूं। छठ महापर्व सुख-शांति के लिए रखा जाता है। मैं पिछले पांच साल से यह महाव्रत कर रही हूं। इस दौरान हम घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं। चूल्हे में प्रसाद बनाते समय आम की लकड़ी का प्रयोग करते हैं। भोजन बनाते समय स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। शनिवार को नहाय खाय किया गया। शाम को चावल और लौकी की सब्जी और चना दाल बनाई गई। इन दिनों भोजन में सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है।
संगीता यादव, गोपाल कॉलोनी।
व्रत के सभी नियमों का करती हूं पालन
मेरी शादी को आठ साल हो गए हैं। बच्चे छोटे होने से अभी तक मेरी सास ही इस व्रत को करने की परंपरा निभा रही है। मैं मूलरूप से बिहार के झंझारपुर की रहने वाली हूं। शादी के बाद से ही मैं अपने पति व बच्चों के साथ टीडीआई फरीदपुर में रह रही हूं। बिहार गांव में मेरी सास इस व्रत को करती है। व्रत के सभी नियमों का पालन मैं यहां भी करती हूं। नहाय खाय के दिन चावल, लौकी की सब्जी का भोजन सेंधा नमक का प्रयोग करके बनाती हूं। संध्या और सूर्य अर्घ्य देने के लिए हम सभी घाट पर जाते हैं और छठ मैया से परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं और प्रसाद का वितरण करते हैं।
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पूजा झा, टीडीआई फरीदपुर पानीपत।
मैं पांच साल से कर रही हूं छठ व्रत
मैं मूलरूप से बिहार के समस्तीपुर की रहने वाली हूं। पिछले 21 साल से देशराज कॉलोनी में रह रही हूं। छठ महापर्व का व्रत मैं पांच साल से कर रही हूं। पहले मेरी सास यह व्रत करती थी। उनके पांच साल पहले देने के बाद मैं इस व्रत को करने लगी हूं। हमारे यहां परंपरा है कि बच्चों के बड़े या सक्रिय होने के बाद ही इस 36 घंटे निर्जला व्रत को शुरू किया जाता है। एक बार शुरू करने के बाद इसे बीच में नहीं छोड़ा जाता है। दिवाली के बाद से ही शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। लहसुन-प्याज का सेवन बंद कर दिया जाता है। शनिवार को नहाय खाय किया गया। रविवार को खरना किया जाएगा। सोमवार को संध्या अर्घ्य और मंगलवार को सूर्य अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा। सूर्य को अर्घ्य देकर घाट पर कथा की जाती है और प्रसाद वितरित किया जाता है।
वंदना कुमारी, देशराज कॉलोनी।

रूबि। स्रोत : स्वयं

रूबि। स्रोत : स्वयं

रूबि। स्रोत : स्वयं

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