नोएडा। कोविड-19 के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले एक आरोपी को पुलिस और औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने सेक्टर-29 स्थित डीपीएस स्कूल के पास से गिरफ्तार किया है। सेक्टर-168 स्थित एक सोसाइटी में किराए पर रह रहे आरोपी रचित घई से भारत और बांग्लादेश की कंपनियों द्वारा निर्मित 105 रेमडेसिविर इंजेक्शन बरामद किए गए हैं। आरोपी पिछले 2 महीने से नोएडा में रहकर रेमडेसिविर की कालाबाजारी कर रहा था।
डीसीपी क्राइम अभिषेक सिंह ने बताया कि कोतवाली सेक्टर-20 पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने आरोपी रचित को गिरफ्तार किया है। उसके से 105 इंजेक्शन के अलावा सेंट्रो कार और 1.54 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं। पूछताछ में पता चला है कि आरोपी कोरोना महामारी का फायदा उठाकर लोगों को रेमडेसिविर इंजेक्शन 15000 से लेकर 40 हजार रुपये तक में बेच रहा था।
आरोपी ने कुछ इंजेक्शन दिल्ली से और ज्यादातर चंडीगढ़ से मंगवाएं थे। पुलिस पूरे नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है और इसके स्रोत के बारे में पता लगाया जा रहा है। कोतवाली सेक्टर-20 पुलिस ने आरोपी के खिलाफ औषधि व प्रसाधन सामग्री अधिनियम महामारी एक्ट और धोखाधड़ी समेत अन्य मामलों में रिपोर्ट दर्ज की है। आरोपी के साथियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
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दिल्ली में चलाता था गत्ता फैक्ट्री, बंद होने पर शुरू की कालाबाजारी
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि कोविड-19 के प्रथम दौर से पहले वह दिल्ली में गत्ता फैक्ट्री चलाता था। लॉकडाउन के बाद उसकी फैक्ट्री बंद हो गई और उसे काफी नुकसान हुआ। इसके बाद उसने स्वास्थ्य विभाग में दलाली शुरू कर दी और धीरे-धीरे कोविड-19 से जुड़ी दवाइयों की कालाबाजारी करने लगा। जब कोविड-19 का दूसरा दौर आया और रेमडेसिविर की काफ ी मांग बढ़ गई तब आरोपी ने अपने दोस्तों के माध्यम से दिल्ली और चंडीगढ़ में संपर्क किया और वहां से थोक में इंजेक्शन लेकर अपने पास स्टॉक कर लिए।
सोशल मीडिया के माध्यम से मरीज के परिजनों से करता था संपर्क
पूछताछ में पता चला कि रचित सोशल मीडिया के माध्यम से कोविड-19 मरीजों के परिजनों से संपर्क करता था। वर्तमान में कई संक्रमित मरीजों के परिजन सोशल मीडिया पर लोगों से मदद की अपील कर रहे हैं। रचित सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसे लोगों का पता लगाता जिन्हें रेमडेसिविर की जरूरत होती। इसके बाद जरूरतमंदों से संपर्क कर ब्लैक में इंजेक्शन बेचता था। जांच में पता चला है कि आरोपी अब तक 400 से अधिक रेमडेसिविर इंजेक्शन बेच चुका है।
आरोपी पर होगी एनएसए की कार्रवाई
एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस टीम पता लगा रही है कि बरामद इंजेक्शनों का उत्पादन कहां हुआ है और डिस्ट्रीब्यूटर कौन है। प्रारंभिक जांच में किसी बड़े नेटवर्क के शामिल होने की आशंका है जो महामारी के समय में कालाबाजारी कर पीड़ितों से धन उगाही कर रहा है।
रेमडेसिविर की क्यों बढ़ी मांग
कोविड-19 संक्रमण के दूसरे दौर में रेमडेसिविर इंजेक्शन की सबसे अधिक मांग है। चिकित्सकों के मुताबिक इस इंजेक्शन से वायरस का प्रभाव कम होता है। वर्तमान दौर में यह इंजेक्शन फेफड़ों में संक्रमण को फैलने से रोकता है। इस कारण इंजेक्शन की मांग बहुत अधिक है। अलग-अलग फ ार्मा कंपनियों के इंजेक्शनों की बाजार में अलग-अलग कीमतें हैं।