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Noida News: जीएसटी फर्जीवाड़े में फंसे आरोपी को नहीं मिली अग्रिम जमानत

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जीएसटी फर्जीवाड़े में फंसे आरोपी को नहीं मिली अग्रिम जमानत
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अदालत ने कहा- आरोपी संगठित गिरोह का हिस्सा, देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सह आरोपियों के साथ मिलकर करीब 2600 फर्जी फर्म बनाकर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम कर सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज कर दी। मामला थाना सेक्टर-20 नोएडा से जुड़ा है।
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रिपोर्ट के अनुसार वादी सौरभ द्विवेदी के पैन कार्ड का दुरुपयोग कर पंजाब और महाराष्ट्र में जीएसटी फर्में रजिस्टर्ड कराई गईं थीं। विवेचना में सामने आया कि आरोपियों ने दस्तावेजों की जालसाजी कर विभिन्न राज्यों में हजारों फर्जी फर्मों का निर्माण किया और इन फर्मों के माध्यम से फर्जी टैक्स इनवाइस तैयार कर आईटीसी क्लेम किया। जीएसटी की इंटेलिजेंस विंग डीजीजीआई के अनुसार इन फर्मों के जरिए करीब 26,452 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी क्लेम किया गया है। सरकारी वकील ने अदालत के सामने कहा कि दीपक सिंघल इस बड़े नेटवर्क का हिस्सा है। जिसने पैन कार्ड, आधार कार्ड और मोबाइल नंबरों का दुरुपयोग कर दस्तावेज तैयार किए। इस गिरोह ने न केवल जीएसटी प्रणाली का दुरुपयोग किया, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी गहरा नुकसान पहुंचाया। आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और पूर्व में भी उसकी अग्रिम जमानत अर्जी निरस्त की जा चुकी है। वहीं दीपक सिंघल की ओर से कहा गया कि उसने न तो कोई फर्म बनाई है और न ही किसी जीएसटी नंबर के लिए आवेदन किया। केवल सह आरोपियों के बयान के आधार पर उसे फंसाया जा रहा है। कई सह आरोपियों को उच्चतम न्यायालय से जमानत मिल चुकी है। इसलिए उसे भी अग्रिम जमानत दी जाए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आरोपी ने सह आरोपियों के साथ मिलकर संगठित गिरोह बनाकर फर्जी फर्मों के जरिए अवैध लाभ कमाया और सरकारी राजस्व को क्षति पहुंचाई।
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