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Noida News: लीड पैकेज <bha>--</bha><bha>--</bha>- हादसे दर हादसे, आखिर कब बनेगा नूंह में ट्रामा सेंटर

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लीड पैकेज -


-मुख्यमंत्री ने 7 साल पहले की थी घोषणा, अब तक नहीं हुई कोई कार्रवाई
-जिले से गुजर रहे हैं दिल्ली- मुंबई, केएमपी व दिल्ली-अलवर नेशनल हाइवे
शेरसिंह डागर
नूंह। हादसे दर हादसे, आखिर कब बनेगा नूंह में ट्र्रॉमा सेंटर। यह सवाल जिले में हर किसी के मन में कौंध रहा है। सात साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री ने जिले में ट्रॉमा सेंटर बनाने की घोषणा की थी। उस समय आस जगी थी कि जल्द ही नेशनल हाइवे पर हादसों का शिकार होने वाले लोगों को राहत मिलेगी। लेकिन मामले में अब तक कार्रवाई न होने से लोगों में रोष व्याप्त है।
जिले से दो हाइवे दिल्ली-मुंबई, केएमपी व दिल्ली-अलवर नेशनल हाइवे गुजर रहे हैं। आए दिन सड़क हादसों में लोग दम तोड़ रहे हैं, लेकिन सरकार पर इसका कोई असर नहीं है। बीते शनिवार को लोगों को ट्रॉमा सेंटर की कमी उस समय फिर खली, जब एक पिकअप गाड़ी ने दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे पर सफाई कर रहे 11 लोगों को कुचल दिया। दुर्घटना में 7 की मौके पर मौत हो गई बाकी जिंदगी मौत से जूझती रही। इससे पहले एक साल पहले कुंडली- मानेसर -पलवल एक्सप्रेस वे पर एक बस में आग लगने पर नौ लोग जिंदा जल गए और दो दर्जन लोग इलाज के लिए इधर उधर तड़पते नजर आए। जिले में कोई खास स्वास्थ्य सेवा न होने के कारण पीड़ितों को गुरुग्राम, दिल्ली सहित अन्य अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ा।
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यह पहला मौका नहीं है, इससे पहले भी सड़क हादसों में यहां एक साथ कई -कई लोगों ने अपनी जान गंवाई है। खास बात यह है कि मेवात की अनदेखी का यह आलम तब है जब यहां से तीन नेशनल हाईवे गुजरते हैं और इन पर आए दिन लोग हादसे के शिकार होते हैं। इतना ही नहीं 7 साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने नूंह जिले में ट्रॉमा सेंटर बनाने की घोषणा भी की थी, लेकिन सरकार ने उस पर आज तक अमल नहीं किया। लिहाजा आए दिन लोग मौत के शिकार हो रहे हैं। लेकिन सरकार के कान पर जूं नहीं रेंग रही। इससे पहले दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे पर कई बड़े हादसे हुए हैं जिनमें आमजन नहीं बल्कि नेताओं ने अपने परिजन खोए हैं।


मनोहरलाल खट्टर ने की थी घोषणा

बढ़ती दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए करीब सात साल पहले मेवात विकास बोर्ड की बैठक में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ट्रामा सेंटर को बनाने के लिए आदेश जारी किए थे। लेकिन आज तक इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं है। ट्रामा सेंटर की यह कागजी फाइल कहां है इस बारे में भी अधिकारियों को ज्यादा जानकारी नहीं है।

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पिछले कुछ सालों में सैंकड़ों लोगों ने गंवाई जान
बता दें, कि नूंह दिल्ली-अलवर वाया नूंह को सरकार ने नेशनल हाइवे नंबर 248 ए घोषित बना दिया है। लेकिन ये रोड नूंह से आगे राजस्थान बॉर्डर तक सिंगल है। लिहाजा यहां आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसके अलावा मेवात के होते हुए केएमपी व दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस हाईवे भी चालू हो गया है। जिनमें पिछले कई सालों में कई सौ जान चली गई तो हजारों लोग घायल हो चुके हैं। समय पर उचित उपचार न मिलने के कारण अधिकांश जिदंगी रास्ते में ही दम तोड़ देती हैं। क्योंकि मांडीखेड़ा के आसपास होने वाली सडक़ दुर्घटना के लिए मेडिकल कॉलेज नलहड़ व गुरुग्राम से पहले इलाज की कोई बेहतर व्यवस्था नहीं है। मेडिकल कॉलेज भी इतना कारगर साबित नहीं है। ऐसे में लोग गुरुग्राम या फिर अलवर पर निर्भर रहते हैं और यहां तक पहुंचने में डेढ़ से दो घंटे तक लग जाते हैं। लिहाजा दुर्घटना में घायल लोग दम तोड़ देते हैं।
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नए एक्सप्रेसवे से बढ़ी जरूरत:
दिल्ली- मुंबई -बड़ोदरा एक्सप्रेस वे निकलने से मेवात में ट्रामा सेंटर की जरूर और ज्यादा बढ़ गई है । दावा था कि इस एक्सप्रेसवे पर लोगों को 24 घंटे अस्पताल की सुविधा मिलेगी। हर 30 किलोमीटर पर अस्पताल होगा।जहां विशेष चिकित्सक, ऑक्सीजन, वेंटीलेटर व घायलों को तुरंत इलाज मिलेगा। इस एक्सप्रेसवे की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 फरवरी 2023 को दोसा से की, तो 9 मार्च 2019 को सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इसके निर्माण कार्य की शुरुआत की थी। लाखों करोड़ खर्च करने के बाद भी यहां ट्रॉमा सेंटर नहीं बनाया। क्योंकि यहां इस एक्सप्रेस वे पर आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। जिसमें अधिकांश लोगों को मौत का सामना करना पड़ता है। ऐसे में मेवात जिले में ट्रॉमा सेंटर जरूरी है। यह एक्सप्रेस वे मेवात के करीब 40 किलोमीटर के एरिया से निकल रहा है।


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हादसों पर एक नजर

- 23 अगस्त 2023 को कुबेर ग्रुप के मालिक विकास मालू की रोल्स-रॉयस कार यहां दुर्घटनाग्रस्त हुई थी।

- दिसंबर 2023 में अमेरिकी नागरिक एलिजाबेध की मौत भी दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुई थी।

- पंचकूला की डीसी की पत्नी सोनिया सारवान दुर्घटनाग्रस्त हुई थी।

- पूर्व में विदेश मंत्री जसवंत सिंह के बेटे एवं बाड़मेर से राजस्थान के पूर्व सांसद मानवेंद्र सिंह की पत्नी चित्रा सिंह की मौत भी इस दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे पर हो चुकी है।
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- एक्सप्रेस वे पर साल में 100 से अधिक मौत का आंकड़ा है। इनके अलावा केएमपी व नेशनल हाइवे 248 ए अलग है। वहां भी मौतों का आंकड़ा बढ़ा है।

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ट्रॉमा सेंटर का बजट मंजूर हो चुका है। जल्द ही इस पर मांडी खेड़ा अल आफिया अस्पताल में काम शुरू कराया जाएगा। एक्सप्रेस वे हाईवे पर होने वाली मौतों का आंकड़ा बहुत ज्यादा है। जो दुख है । हमारी कोशिश है जल्द से जल्द ट्रॉमा सेंटर बनवाया जाए ।

विश्राम मीणा डीसी नूंह
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