जय सिंह पथिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित हुई पांचवीं राष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेट चैंपियनशिप
दिव्यांग खिलाड़ी बोले- बुलंद हौसलों के आगे हर बाधा छोटी है
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। जय सिंह पथिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित पांचवीं राष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेट चैंपियनशिप में मंगलवार को आयोजित हुए मुकाबले केवल खेल नहीं, बल्कि मानवीय जिजीविषा का उत्सव भी बने। मैदान पर जब दिव्यांग खिलाड़ियों ने व्हीलचेयर पर बैठकर पूरी ताकत के साथ चौके-छक्के जड़े, तो दर्शकों की तालियां यह तस्दीक कर रही थीं कि दिव्यांगता शरीर की बाधा हो सकती है, उड़ान भरने वाले मन की नहीं। मंगलवार को खेले गए दो मुकाबलों में कर्नाटक और मुंबई ने शानदार जीत दर्ज की।
दिन के पहले संघर्ष में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच 15-15 ओवरों की जंग हुई। कर्नाटक की शुरुआत धीमी रही और जब 37 के स्कोर पर अभि स्वयं (06) के रूप में पहला विकेट गिरा, तो लगा कि राह मुश्किल होगी। लेकिन शिव प्रसाद की 43 रनों की साहसी पारी ने यह बता दिया कि बाधाएं कितनी भी हों, उनका सीना चीरकर आगे बढ़ा जा सकता है। विपक्षी गेंदबाज एम. संतोष ने अपनी धारदार गेंदबाजी से चार विकेट चटकाकर कर्नाटक की रफ्तार रोकने की कोशिश की और मैन ऑफ द मैच बने, लेकिन कर्नाटक की इच्छाशक्ति भारी पड़ी। 149 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी आंध्र प्रदेश की टीम की ओर से राजू ने 40 रनों की जुझारू पारी खेलकर जीत की उम्मीदें जगाईं, पर खलील अहमद की कसी हुई गेंदबाजी के आगे आंध्र की टीम 3 विकेट पर 101 रन ही बना पाई। आखिरकार, कर्नाटक ने 47 रनों से जीत दर्ज कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
वहीं, दूसरा मुकाबला हरियाणा और मुंबई के बीच उस जज्बे का गवाह बना जिसे 'असंभव' को चुनौती देना कहते हैं। हरियाणा ने पहले बल्लेबाजी करते हुए वेदपाल की 77 रनों की आतिशी पारी के दम पर 206 रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया था। मुंबई के सय्यद शकील आज इतिहास रचने के इरादे से उतरे थे। शकील ने अपनी जिद्द और जुनून को बल्ले में उतारा और महज 51 गेंदों पर 19 चौकों व एक छक्के की मदद से नाबाद 102 रनों की करिश्माई पारी खेली। इस महासमर में उन्हें गणेश बालकृष्ण (77 रन) का कंधा मिला। मुकाबले के आखिरी लम्हों में जब सांसें थमीं हुईं थीं, तब संतोष ने विजयी चौका लगाकर मुंबई को 4 विकेट से अविश्वसनीय जीत दिला दी। उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया। जीत के बाद खिलाड़ियों की चमकती आंखों ने बस यही कहा - हौसले बुलंद हों तो हर बाधा छोटी पड़ जाती है।
पहला मुकाबला कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच 15-15 ओवर का खेला गया। कर्नाटक ने पहले बल्लेबाजी करते हुए नौ विकेट पर 148 रन बनाए। हालांकि टीम की शुरुआत धीमी रही। 37 के स्कोर पर अभि स्वयं के रूप में टीम को पहला झटका लगा, लेकिन शिव प्रसाद ने 43 रनों की शानदार पारी खेलकर टीम को संभाला। आंध्र प्रदेश की ओर से एम. संतोष ने घातक गेंदबाजी करते हुए चार विकेट लिए, जिसके लिए उन्हें 'मैन ऑफ द मैच' का खिताब मिला। वहीं, लक्ष्य का पीछा करते हुए आंध्र प्रदेश की टीम राजू की 40 रनों की जुझारू पारी के बावजूद 3 विकेट पर 101 रन ही बना सकी और कर्नाटक ने यह मैच 47 रन से जीत लिया। कर्नाटक की ओर से खलील अहमद ने 2 विकेट चटकाए।
वहीं, दूसरा मुकाबला हरियाणा और मुंबई के बीच रहा। हरियाणा ने पहले खेलते हुए 20 ओवर में 6 विकेट खोकर 206 रन बनाए। इसमें वेदपाल की 77 रनों की पारी का अहम योगदान रहा। लेकिन मुंबई के सय्यद शकील ने इस नामुमकिन से दिखने वाले लक्ष्य को अपनी जिद्द से मुमकिन कर दिखाया। शकील ने महज 51 गेंदों पर 19 चौकों और 1 छक्के की मदद से नाबाद 102 रनों की पारी खेली। उनका साथ गणेश बालकृष्ण ने 77 रन बनाकर निभाया। अंतिम क्षणों में संतोष ने चौका लगाकर मुंबई को चार विकेट से जीत दिलाई। शतकीय पारी खेलने वाले शकील को 'मैन ऑफ द मैच' से नवाजा गया। इस मौके पर खिलाड़ियों ने कहा कि हौसले बुलंद हों तो हर बाधा छोटी पड़ जाती है।