लखनऊ। विरोधियों को फंसाने के लिए झूठी घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने के मामले में एससी एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने विनोद कुमार राय और निर्मला शुक्ला को आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि विवेचना में शामिल सीडीआर में आरोपियों की उपस्थिति घटनास्थल पर नहीं पाई गई है।
इसके अलावा मान लिया जाए कि घटना 21 मई 2025 की है तो उस दिन कथित घटनास्थल पर भंडारा हो रहा था। ऐसे में वहां बड़ी संख्या में लोग थे। घटना के तुरंत बाद पुलिस को सूचित न करना, आरोपी की उपस्थिति मौके पर न होना और गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाया गया है। जब वादी ने एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली अर्जी दी थी तब मड़ियांव थाने की पुलिस ने रिपोर्ट दी थी कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। आदेश में कहा गया कि वादी ने भूमाफिया के साथ मिलकर हनुमान मंदिर की कीमती जमीन हड़पने के लिए झूठा मुकदमा दर्ज कराया है। कोर्ट ने कहा कि कथित घटना में वादी की पत्नी पुष्पा को पीटने का आरोप है। हालांकि, उनका भी डॉक्टरी परीक्षण नहीं कराया गया है।