पड़ोसी राज्यों से पानी मांगने के बजाय जल
संरक्षण पर देना चाहिए ध्यान : सुप्रीम कोर्ट
प्वाइंटर
- कहा, क्या पौधों पर पानी की बौछार करना पानी की बर्बादी नहीं है?
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि पड़ोसी राज्यों से पानी मांगने के बजाय जल संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए। यह टिप्पणी कोर्ट ने दिल्ली सरकार की उस याचिका पर की जिसमें उसने हरियाणा को दिल्ली के लिए और अधिक यमुना का पानी देने का निर्देश देने की अपील की थी। कोर्ट ने कहा कि हम सिर्फ दिल्ली के लिए आदेश कैसे पारित कर सकते हैं।
जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि पड़ोसी राज्यों से पानी की मांग करने के बजाय जल संरक्षण के सिद्धांत का पालन करना चाहिए। दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि राजनीतिक कारणों की वजह से दिल्ली के लोग पानी की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं। इस पर पीठ ने कहा कि अगर हमने दिल्ली के लिए आदेश पारित किया तो हरियाणा के लोग जूझेंगे। इस पर वकील ने कहा कि पहले दिल्ली को 1600 क्यूसेक पानी हरियाणा से मिलता था लेकिन अब 1390 क्यूसेक की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने दिल्ली की बढ़ती आबादी का हवाला भी दिया। पीठ ने कहा कि इसका समाधान जल संरक्षण है न कि पानी की उत्पत्ति से। पीठ में शामिल जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा कि हमने दिल्ली में पौधों पर पानी की बौछार करते हुए देखा है, क्या यह पानी की बर्बादी नहीं है?