फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नहाय-खाय के साथ आज से शुरू होगा छठ महापर्व

विज्ञापन
विज्ञापन
नहाय-खाय के साथ आज से शुरू होगा छठ महापर्व
विज्ञापन

गुरुग्राम। सूर्य उपासना का चार दिवसीय पूर्वांचल वासियों का महापर्व छठ आज से शुरू हो रहा है। शनिवार को गुरुग्राम में रह रहे पांच लाख से अधिक पूर्वांचलवासी छठ की तैयारियों में जुटे रहे। शनिवार का दिन उनके लिए काफी व्यस्तता भरा रहा। सभी सुबह से लेकर देर शाम तक छठ महापर्व की तैयारी को अंतिम रूप देने में लगे रहे। रविवार को छठ पर्व का आरंभ नहाय-खाय के साथ शुरू होगा। साइबर सिटी में तकरीबन 35 स्थानों पर छठ पूजा की जाएगी। इसके लिए जगह-जगह तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
वहीं शीतला माता मंदिर स्थित ब्रह्म सरोवर की भी सफाई का कार्य किया गया। पर्व के पहले दिन रविवार को नहाय-खाय की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जबकि दूसरे दिन सोमवार को खरना होगा, वहीं मंगलवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ पर्व संपन्न हो जाएगा।
विज्ञापन

उधर अटूट श्रद्धा भक्ति के इस पर्व को लेकर उत्साहित व्रती बाजारों में खरीददारी करने को जुट गए हैं। सदर बाजार में छठ पूजा का सामान खरीदने के लिए बड़ी संख्या में पूर्वांचल के निवासी पहुंचे। वहीं छठ पर्व आयोजन समितियों ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम व व्रती को किसी तरह की परेशानी न हो, ऐसे बंदोबस्त शुरू कर दिए हैं। समितियों की ओर से विभिन्न इलाकों के साथ-साथ शीतला माता मंदिर स्थित ब्रह्म सरोवर स्थित घाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। सेक्टर-चार में भी घाट की सफाई कर दी गई है, जबकि मानेसर में घाट बनाने के लिए खुदाई की गई है।
विज्ञापन

व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के अनुसार, सच्चे मन से की जाने वाली छठ पूजा से मनुष्य को मनवांछित फल मिलता है। महिलाएं अपने पति, बच्चों व पूरे परिवार की सुख समृद्धि, शांति व लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। छठ पर्व के उपलक्ष्य में रविवार को नहाय-खाय के दौरान व्रती नहाने के बाद कद्दू एवं चावल खाएंगे। इसके बाद उनका व्रत शुरू हो जाएगा। वह सोमवार को पूरा दिन व्रत रखेंगे, शाम को खरने में अनेक पकवान खाने के साथ उनका व्रत खुलेगा। इसके बाद ही उनका व्रत पुन: शुरू हो जाएगा और बुधवार को उगते सूर्य का अर्घ्य देने तक उनका व्रत जारी रहेगा। वह पानी में खड़े होकर विभिन्न स्थानों पर मंगलवार की शाम ढलते सूर्य और बुधवार की सुबह निकलते सूर्य को अर्घ्य देंगे।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें