हेडिंग: जीएसटी रिटर्न हुआ आसान पर बढ़ गया फर्जीवाड़ा
238 करोड़ की धोखाधड़ी मामले की जांच जारी, बढ़ सकता है आंकड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। कारोबारियों को राहत देने के लिए जीएसटी रिटर्न प्रक्रिया को आसान तो बना दिया गया, लेकिन अब यही राहत सरकार के लिए बड़ी आफत बनती जा रही है। फर्जी कंपनियां बनाकर बोगस बिलों के जरिये कर चोरी के मामले बढ़ रहे हैं। इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के रूप में 238 करोड़ की धोखाधड़ी के बड़े खुलासे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर (सीजीएसटी) ने इस मामले का खुलासा बुधवार को किया था जिसमें दिल्ली में रहने वाले दो भाइयों ने कई जगह अपने व रिश्तेदारों के नाम से करीब 70 फर्जी कंपनियों का पंजीयन कराकर देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित फर्मों से सिर्फ कागजों में कारोबार कर डाला। नकली बिल बनाकर 1681.61 करोड़ रुपये के माल की आपूर्ति दिखाई गई। आईटीसी के रूप में अब तक 238 करोड़ की धोखाधड़ी सामने आ चुकी है। सीजीएसटी अधिकारियों का मानना है कि जांच जारी है। देशभर में संबंधित महकमों को सूचित किया गया है। फर्जीवाड़े की रकम और फर्जी कंपनियों का आंकड़ा बढ़ सकता है।
जीएसटीआर-2 व 3 निलंबित होने से बढ़ा फर्जीवाड़ा
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि पहले जीएसटीआर-2 व जीएसटीआर-3 भरने का नियम था, लेकिन कारोबारियों ने इस प्रक्रिया को जटिल बताते हुए इसमें बदलाव की मांग उठाई थी। जीएसटीआर-2 में महीनेभर की सारी खरीदारी का ब्योरा देना होता था जबकि जीएसटीआर-3 में मासिक बिक्री और खरीदारी का संक्षिप्त ब्योरा देना होता था। इन दोनों के आधार पर यह तय होता था कि संबंधित कंपनी या फर्म पर कितने कर की देनदारी है। एडवोकेट अतुल्य शर्मा ने बताया कि जीएसटीआर-2 व 3 को निलंबित कर दिया गया, जिसके बाद फर्जीवाड़े की संभावनाएं ज्यादा बढ़ गई हैं। रोज इस तरह के नए खुलासे हो रहे हैं। बोगस बिलों के जरिये कागजों में कारोबार दिखाकर आईटीसी क्लेम का लाभ लेने वाले कई मामले अब तक सामने आ चुके हैं।