जिले में नहीं थम रही सरकारी अनाज की कालाबाजारी
- गेहूं के 250 कट्टों से भरा कैंटर पकड़ा, केएमपी धुलावट मोड़ के पास सीआईए ने नाकेबंदी कर किया काबू
- खाद्य एवं पूर्ति निरीक्षक के बयान पर मामला दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
तावडू। तमाम कोशिशों के बावजूद जिले में सरकारी अनाज की कालाबाजारी थमने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार शाम सीआईए ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में अनाज की कालाबाजारी करने के मामले में एक कैंटर चालक को सरकारी गेहूं के 250 कट्टे सहित काबू किया है। इससे पहले भी 2010-2016 व 2017 में अवैध ढंग से गरीबों का राशन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता हुआ पकड़ा जा चुका है। पुलिस ने खाद्य विभाग के स्थानीय निरीक्षक के बयान पर नामजद आरोपी चालक के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
सीआईए तावडू के सहायक उप निरीक्षक एवं जांच अधिकारी सतबीर सिंह ने बताया कि शुक्रवार शाम करीब 4 बजे टीम को खाद्य एवं पूर्ति विभाग के निरीक्षक से सूचना मिली कि सरकारी गेहूं से भरा एक कैंटर धुलावट मोड़ केएमपी एक्सप्रेसवे से गुरुग्राम में बिकने के लिए जा रहा है। सूचना मिलने के तुरंत बाद निरीक्षक की मौजूदगी में धुलावट मोड़ के पास नाकेबंदी कर पुलिस ने चालक सहित कैंटर को काबू कर लिया। जांच के दौरान कैंटर में सरकारी गेहूं से भरा 250 कट्टा बरामद हुआ। पुलिस के पूछताछ करने पर आरोपी चालक सरकारी गेहूं का कोई बिल पेश नहीं कर पाया। जबकि आरोपी ने बताया कि वह गेहूं को हैफड के गोदाम नूंह से भरकर लाया है और गुरुग्राम लेकर जा रहा है। जब पुलिस ने एफसीआई मैनेजर वेद प्रकाश से फोन पर कैंटर के नंबर सहित अन्य बारे में जानकारी ली तो मैनेजर ने बताया कि करीब 2 से 2:30 बजे उपरोक्त कैंटर गोदाम से गेहूं के कट्टे भरकर निकला है। पुलिस ने कैंटर को कब्जे में लेकर स्थानीय खाद्य एवं पूर्ति निरीक्षक चांद सिंह के बयान पर आरोपी चालक अय्यूब निवासी गांव रूपडाका थाना बहीन जिला पलवल के खिलाफ केस दर्ज किया है। स्थानीय निरीक्षक द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में यह खुलासा नहीं किया गया कि यह अनाज किस खंड के कौन-कौन से डिपो पर जाना था। मात्र कैंटर चालक को आरोपी बना इतिश्री कर ली गई। जिसे लेकर विभागीय कार्रवाई में धांधली की बू झलक रही है।
इस बारे में एफसीआई के मैनेजर वेद प्रकाश का कहना है कि गेहूं किस डिपो पर जाना था यह जानकारी उनके पास नहीं होती है। इसके बारे में खाद्य एवं पूर्ति विभाग के अधिकारी ही बता सकते हैं। इस संबंध जानकारी लेने के लिए जब निरीक्षक तावडू चांदसिंह व डीएफएससी नूंह सीमा से संपर्क करने का प्रयास किया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
पहले भी पकड़ा जा चुका है कालाबाजारी का कारोबार
ज्ञात हो कि जिले में पहली बार अक्टूबर 2010 में भ्रष्टाचार का मामला उस समय सुर्खियों में आया था। जब नूंह निवासी विनोद कुमार उर्फ पप्पी को पलडी रोड स्थित आटा चक्की से पुलिस ने करीब तीन सौ सरकारी गेहूं के कट्टे बेचते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। इस मामले में पुलिस ने मिल संचालक, एफसीआई के स्टाक कीपर व ठेकेदार सहित कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जांच के बाद भ्रष्टाचार में शामिल होने के आरोप में विभाग के कई निरीक्षकों को उस समय जेल की हवा खानी पड़ी था। इसके बाद फरवरी 2012 में भ्रष्टाचार को लेकर खाद्य आपूर्ति विभाग नूंह में कार्यरत कर्मचारी मनोज कुमार को भी तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने गिरफ्तार किया था। जुलाई 2016 में खानपुर घाटी के दो व्यक्तियों की सूचना पर सीआईए पुलिस ने गेहूं से भरे एक ट्रैक्टर ट्राली को अवैध तरीके से ले जाते हुए पकड़ा था। जिसे नगीना पुलिस ने पूछताछ करने पर छोड़ दिया। जिसका मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया था। जनवरी 2017 में तावडू पुलिस द्वारा नगर के बाईपास से एक ट्रक को 320 सरकारी गेंहू के कट्टों सहित पकड़ा गया।
पकडे़ गए आरोपी चालक से पूछताछ के बाद पर्दाफाश होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इस मामले में जो भी लोग शामिल होंगे उन्हें बख्शा नहीं जायेगा। सतबीर सिंह, उप सहायक निरीक्षक, सीआईए
फोटो कैप्शन: पुलिस द्वारा कब्जे में लिया गया गेहूं से भरा कैंटर।