हेडिंग: ट्रांसपोर्टर हड़ताल : जिले के उद्योगों को 500 करोड़ का नुकसान
सबहेड: नोएडा में माल की आवाजाही रुकने से इकाइयां बंदी के कगार पर, करोड़ों का माल अटका
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। ट्रांसपोर्टरों की देशव्यापी हड़ताल का उद्योग जगत पर व्यापक असर पड़ने लगा है। बृहस्पतिवार को हड़ताल के सातवें दिन नोएडा के करीब 550 ट्रांसपोर्टरों के 3 हजार से ज्यादा ट्रकों के पहिए थमे रहे। औद्योगिक इकाइयों में माल की आवाजाही पूरी तरह से बंद है, जबकि कच्चे माल की कमी से कई इकाइयाें में उत्पादन ठप होने के कगार पर है। सात दिन से जारी हड़ताल के कारण जिले की करीब 10 हजार इकाइयों को 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान का अनुमान है।
औद्योगिक संगठनों के एक अनुमान के मुताबिक, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के छोटे-बड़े उद्योगों का करोड़ों का तैयार माल अटक गया है। एक तरफ कच्चा माल नहीं आ रहा तो दूसरी तरफ तैयार माल की आपूर्ति नहीं होने से उद्यमियों-कारोबारियों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। एनईए अध्यक्ष विपिन मल्हन ने बताया कि ज्यादातर उद्योगों की सप्लाई दूसरे राज्यों में होती है। दोनों शहरों में स्थापित तकरीबन 10 हजार कोरेगोटेड, टेक्सटाइल, मेटल व प्लास्टिक मोल्डिंग, इलेक्ट्रिकल गुड्स और ऑटोमोटिव इकाइयां पुराने स्टॉक की बदौलत चल रही थीं। कई इकाइयों में उत्पादन बंद या न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। उद्यमियों ने साफ किया है कि यदि हड़ताल एक दो दिन में न खुली तो हालत और भी बदतर हो जाएंगे।
अंदर जारी हैं सेवाएं
नोएडा ट्रांसपोर्टर संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष चौधरी वेदपाल का कहना है कि नोएडा से दिल्ली के अलावा बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तरांचल और हिमाचल, कोलकाता के बीच सबसे ज्यादा आवाजाही होती है। हालांकि, जिले के अंदर ट्रांसपोर्टरों की सेवाएं जारी हैं लेकिन कोई भी गाड़ी जिले से बाहर नहीं भेजी जा रही है।
स्टॉक बढ़ा, ऑर्डर पर खतरा
उद्योग मंच के अध्यक्ष अजय मल्होत्रा ने बताया कि कई फैक्ट्रियाें में माल रखने की जगह नहीं बची है। कुछ इकाइयों से प्रोडक्शन बंद होने की सूचना मिल रही है। कुछ कंपनियों ने हड़ताल की पूर्व सूचना पर कच्चे माल का स्टॉक ज्यादा मंगा लिया था, लेकिन हड़ताल इतनी लंबी चलेगी इसका अंदाजा नहीं था। सप्लाई चेन बाधित होने से ऑर्डर रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है।
रोजाना करोड़ों का नुकसान
नोएडा इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन (नीवा) के अध्यक्ष दलजीत सिंह ने बताया कि हड़ताल से न केवल लघु व मध्यम उद्योगों को नुकसान हो रहा है, बल्कि निर्यातकों को भी रोजाना करोड़ों रुपये की चपत लग रही है। ऑटोमोटिव इंडस्ट्री की सप्लाई गुरुग्राम तक भी नहीं हो पा रही है। कच्चे माल की भारी कमी के कारण इकाइयां बंद हो रही हैं। विदेशी बायर्स से रिश्ते खराब होने का डर उद्यमियों में बना हुआ है।
इन मांगों को लेकर हड़ताल
- डीजल की कीमत कम होनी चाहिए, डीजल की कीमत में त्रैमासिक संशोधन हो।
- देशभर में टोल टैक्स से ट्रांसपोर्टराें पर भारी बोझ, टोल बैरियर मुक्त भारत बने।
- थर्ड पार्टी इंश्योरेंस निर्धारण में पारदर्शिता और जीएसटी के दायरे से बाहर हो।
- ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर लगने वाला टीडीएस खत्म हो, ई-वे बिल की समस्याएं खत्म हों।
- डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी योजना समाप्त हो।