- 30-35 हजार बच्चे सीख रहे तैराकी, फिर भी प्रतियोगी खिलाड़ियों का अकाल, 700 में से सिर्फ 56 अकादमियों को मिली एनओसी
नितेश कुमार
ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर में स्विमिंग का क्रेज लगातार बढ़ रहा है, लेकिन प्रतियोगी तैराक तैयार करने की तस्वीर बेहद निराशाजनक है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित ओलंपिया स्विमिंग अकादमी में सोमवार को आयोजित जिला स्तरीय जूनियर तैराकी ट्रायल में पूरे जिले से केवल चार खिलाड़ी ही पहुंचे। जबकि जिले में निजी स्कूलों, सोसाइटियों और सेक्टरों में करीब 700 स्विमिंग पूल संचालित हो रहे हैं, जहां प्रतिदिन 30 से 35 हजार बच्चे और युवा तैराकी सीखते हैं। जानकारी के अनुसार जिले की करीब 700 स्विमिंग अकादमियों और पूलों में से केवल 56 को ही जिला खेल विभाग की ओर से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी किया गया है। बड़ी संख्या में पूल बिना विभागीय अनुमति के संचालित हो रहे हैं। इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और प्रशिक्षकों की योग्यता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
समर कैंप और मनोरंजन गतिविधियों तक सीमित-
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश निजी अकादमियां खेल प्रतिभाएं तैयार करने के बजाय समर कैंप, सदस्यता और मनोरंजन गतिविधियों पर अधिक ध्यान दे रही हैं। यदि प्रत्येक अकादमी हर वर्ष कुछ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करे तो जिले से राष्ट्रीय स्तर के कई तैराक निकल सकते हैं, लेकिन फिलहाल प्रतियोगी खिलाड़ियों की संख्या बेहद सीमित है। जिला स्तरीय ट्रायल का उद्देश्य मंडल, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के लिए प्रतिभाओं का चयन करना होता है। ट्रायल में शामिल चारों खिलाड़ियों का चयन मंडलीय प्रतियोगिता के लिए कर लिया गया है, लेकिन इतनी कम भागीदारी ने खेल विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
कोट-
जिला स्तरीय ट्रायल एसोसिएशन के समन्वय से कराए गए हैं। भविष्य में अधिक खिलाड़ियों को प्रतियोगी तैराकी से जोड़ने और जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं आयोजित करने की योजना है। -डॉ. परवेज अली, प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी