नोएडा। सेक्टर-58 पुलिस ने फोर्टिस अस्पताल के बाहर नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने के लिए आए गिरोह का भंडाफोड़ कर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि गिरोह का सरगना फरार है। आरोपियों में एक पूर्व कैबिनेट मंत्री का भांजा भी शामिल है। आरोपी 40 से 45 हजार रुपये में एक इंजेक्शन को बेच रहे थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग कंपनियों के 18 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन, एक किलो मेरोपिनम पाउडर व 2.45 लाख रुपये भी बरामद किए हैं। एक आरोपी बड़ी दवा कंपनी का प्रतिनिधि (एमआर) है जबकि दो आरोपी अस्पतालों में नर्सिंग का काम करते हैं।
नोएडा जोन के एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि कोरोना के कारण कुछ लोग रेमडेसिविर समेत अन्य दवाओं की कालाबाजारी कर रहे हैं, लेकिन शनिवार को एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने झकझोर कर रख दिया। आरोपी मेरोपिनम पाउडर से एक घोल बनाते थे और उसे इंजेक्शन की छोटी बोतलों में भरकर उस पर रेमडेसिविर समेत अन्य दवाओं के लेबल चस्पा कर देते थे। इसके बाद पैकिंग भी हूबहू कर लेते थे, ताकि किसी को संदेह न हो। आरोपी अस्पतालों के आसपास रोते-बिलखते लोगों से बात करते थे और जब इंजेक्शन की मांग पता चलती थी तो सौदा कर 40 से 45 हजार रुपये के बीच एक नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेच देते थे। शनिवार को एक मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ लोग फोर्टिस अस्पताल के बाहर इंजेक्शन की कालाबाजारी कर रहे हैं। एसीपी रजनीश वर्मा के नेतृत्व में सेक्टर-58 थानाध्यक्ष को टीम के साथ बिना वर्दी के भेजा गया।
थानाध्यक्ष व टीम ने आसपास के लोगों से इंजेक्शन की जानकारी मांगी तो एक युवक ने थानाध्यक्ष अनिल कुमार को मिलकर दवा देने का ऑफर दिया। धीरे-धीरे तीन लोग उनके पास आ गए। पुलिस टीम ने चारों को दबोचा तो कुछ दूरी पर खड़े तीन युवक भागने लगे। एसीपी रजनीश वर्मा की टीम ने तीनों को भी दबोच लिया। सभी को हिरासत में लेकर तलाशी ली तो उनके कब्जे से रेमडेसिविर के अलावा अन्य कंपनियों के 18 इंजेक्शन मिले। सख्ती से पूछताछ की तो आरोपियों ने बताया कि वह मेरोपिनम पाउडर से इंजेक्शन बनाते थे। जबकि कुछ इंजेक्शन को कार्बोहाइड्रेड से बनाया जाता था। मेरोपिनम पाउडर निमोनिया की बीमारी में कुछ कारगर है इसलिए उन्होंने इससे रेमडेसिविर के नकली इंजेक्शन बनाने की साजिश रची थी।
गिरफ्तार किए गए आरोपी
हापुड़ के आरिफपुर सरावनी निवासी अजरूददीन मुसीर, मेरठ-किठौर के मौसमी खानी कस्बा निवासी सलमान खान व शाहरुख, मेरठ के लिसाडी गेट मदीना कालोनी निवासी अब्दुल रहमान, हापुड़ के परतापुर निवासी बंटी और फरूखाबाद के जलालपुर निवासी दीपांशु को गिरफ्तार किया गया है। जबकि मुख्य सरगना कादिर फरार है। आरोपियों से 10 मोबाइल बरामद हुए हैं।
आरोपियों के पास से बरामद सामान
आरोपियों के पास से हैट्रो कंपनी के नौ रेमडेसिविर इंजेक्शन व 140 लेबल, एक बिना लेबल का इंजेक्शन, एक पैकेट में मेरोपिनम पाउडर करीब एक किलोग्राम, तीन इंजेक्शन सिप्ला सेफोपेराजोन और सुलबैक्टन, दो इंजेक्शन पेंट्रॉपराजोन, दो बाइक, एक स्कूटी, एक प्रिंटर, सीपीयू, मॉनिटर आदि सामान बरामद किया गया है।
पुलिस को दिया आरोपियों ने ऑफर
जब पुलिस टीम ने आरोपियों को दबोच लिया तो पहले तो उन्होंने अफसरों को लालच देकर ऑफर दिया। जब टीम ने हड़काया तो एक आरोपी ने दूर के मामा का नाम लिया जो प्रदेश की सपा सरकार में कद्दावर कैबिनेट मंत्री रहे हैं, लेकिन पुलिस की फटकार के आगे आरोपियों की नहीं चली।
सरगना हापुड़ से मंगवाता था नकली रेपर
अब्दुल ने बताया कि कादिर उसका चचेरा भाई है और उसने यह पूरा खेल हम लोगों को जोड़कर शुरू किया है। वह हापुड़ निवासी बंटी से रेमडेसिविर और अन्य इंजेक्शन के नकली रेपर बनवाकर लाता था। कादिर पहले से ही इस तरह के महंगे इंजेक्शन नकली बनवाता रहा है। कादिर ही पाउडर और इंजेक्शन की शीशी मुहैया कराता है। उसने अस्पतालों के पास कुछ युवक छोड़ रखे हैं जो अस्पताल से निकले वेस्ट से शीशी लेकर आते थे उनमें पाउडर दिया जाता था।
गाजियाबाद के अस्पताल में काम करते हैं दो आरोपी
पुलिस ने बताया कि गाजियाबाद के कोलंबिया अस्पताल में अब्दुल व दीपांशु नर्सिंग स्टाफ का काम करते हैं। सलमान मेरठ के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से बीफार्मा कर चुका है और बायोटेक कंपनी में एमआर है। मुसीर हीलिंग ट्री अस्पताल इंदिरापुरम गाजियाबाद में टेक्नीशियन है। दीपांशु ने बताया कि वह गाजियाबाद के गोविंदपुरम स्थित कला भवन में रहता था और वहां पर अस्पतालों से निकले खाली इंजेक्शन की बोतलों को तैयार करता था।