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तीन तलाक बिल ने शीत सत्र को बनाया ऐतिहासिक
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- तीन तलाक बिल पास नहीं हुआ पर संसद में पेश किए जाने के लिए याद किया जाएगा यह सत्र
- लोकसभा में 12 और राज्यसभा में नौ बिल हुए पास
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। तीन तलाक बिल भले ही राज्यसभा की देहरी नहीं लांघ पाया हो, लेकिन इस बिल को संसद में पेश किए जाने के चलते यह शीतकालीन सत्र इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। तीन तलाक और जीएसटी संशोधन बिल पास नहीं होने के साथ शुक्रवार को शीत सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। हालांकि इस दौरान लोकसभा में कुल 12 और राज्यसभा में नौ बिल पारित हुए। शीत सत्र में लोकसभा में 14 घंटे 51 मिनट और राज्यसभा में 41 घंटे हंगामे की भेंट चढ़ गए। सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी सदन में उपस्थित रहे।
उच्च सदन में अल्पमत में होने की वजह से सरकार शीत सत्र में भले ही तीन तलाक बिल को पास नहीं करा पाई हो, लेकिन दोनों सदनों में इस बिल को पटल पर रखना और लोकसभा में इसे पारित कराना ही सत्र और सरकार की बड़ी उपलब्धि बन गया है। बहुमत में होने के चलते निचले सदन में सरकार को बिलों को पारित कराने में कोई दिक्कत नहीं आई। यहां कुल 16 बिल रखे गए, जिसमें 12 पारित हो गए। इनमें तीन तलाक, जीएसटी संशोधन, केंद्रीय सड़क निधि, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता संशोधन, जज वेतन व सेवा शर्त संशोधन बिलों का पारित होना प्रमुख रहा। हालांकि लोकसभा में ओबीसी संविधान संशोधन बिल पेश होने के बावजूद पास नहीं हो सका। राज्यसभा में नौ बिल पास हुए, लेकिन तीन तलाक बिल सदन की संपत्ति बनकर रह गया। जीएसटी संशोधन बिल भी पास नहीं हो सका।
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हंगामे की भेंट चढ़े 55 घंटे 51 मिनट
- संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्ष के हंगामे के चलते कुल 55 घंटे 51 मिनट का कार्य बाधित रहा। विपक्ष के बहुमत में होने के चलते राज्यसभा में 41 घंटे हंगामे की भेंट चढ़ गए, जबकि लोकसभा में 14 घंटे 51 मिनट का कार्य नहीं हो सका। स्पीकर सुमित्रा महाजन ने जानकारी दी है कि लोकसभा में आठ घंटे 10 मिनट महत्वपूर्ण मुद्दों पर अतिरिक्त चर्चा हुई। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान 280 तारांकित प्रश्न रखे गए। इनमें 45 का मौखिक उत्तर दिया गया। शून्यकाल के दौरान सांसदों ने जनहित से जुड़े 198 मामले उठाए। सदन में स्पीकर की ओर से लोकसभा की कार्यवाही की जानकारी देने के दौरान जब कार्य बाधा का जिक्र छिड़ा तो सत्ता पक्ष ने कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम लेकर चुटकी ली। स्पीकर ने भी धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान जब खड़गे का नाम लिया तो उन्होंने मजाक में जोर देकर कहा कि खड़गे जी का नाम ले रही हूं, बहुत अच्छा साथ दिया है।
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