50 लाख रुपये बताई जा रही कीमत, दिल्ली-एनसीआर में करते थे सप्लाई
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। कोतवाली फेज-टू पुलिस और सीआरटी टीम ने प्रतिबंधित खैर की लकड़ी की तस्करी के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। उसका दावा है कि आरोपी बिहार से ट्रक में केले और उसके पत्तों के बीच छिपाकर लकड़ी लाकर दिल्ली-एनसीआर में बेचते थे। पुलिस ने ट्रक से 55 क्विंटल लकड़ी बरामद की है। इसकी कीमत बाजार में करीब 50 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस आरोपी अलीगढ़ के नगरिया जाहर निवासी रविंद्र और बिहार के मोतिहारी निवासी ताज खान के अन्य साथियों की तलाश कर रही है।
नोएडा सेंट्रल के डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी का कहना है कि पुलिस टीम ने सीआरटी के साथ मिलकर बृहस्पतिवार को ककराला टी प्वॉइंट पर ट्रक को रोका और उसकी जांच की। यह चेकिंग इंटेलिजेंस की सूचना के आधार पर की गई। इस दौरान केले और उसके पत्तों के बीच 55 क्विंटल लकड़ी मिली। जब इसकी जांच कराई गई तो पता चला कि यह प्रतिबंधित खैर की लकड़ी है जिसकी सप्लाई की अनुमति आरोपियों के पास नहीं थी।
उन्होंने बताया कि आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि वे केले की फर्जी रसीद तैयार करते हैं। बिहार के मधुबनी से एनसीआर में केले की सप्लाई के बहाने खैर की लकड़ी ले जाते हैं। जब कोई चेकिंग होती थी तब ये लोग केले की सप्लाई का कागज दिखा देते थे। ये लकड़ी को दिल्ली व हरियाणा में बेचते थे। आशंका जताई जा रही है कि बिहार से लेकर एनसीआर तक इनका गिरोह काम कर रहा है जो खैर की लकड़ी की तस्करी में लगा हुआ है। डीसीपी सेंट्रल नोएडा ने दोनों को गिरफ्तार करने वाली टीम को 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।
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औषधि और धार्मिक अनुष्ठान में इस्तेमाल होगी है लकड़ी
खैर की लकड़ी का इस्तेमाल मुख्य रूप से कत्था बनाने, औषधि, प्राकृतिक रंग, फर्नीचर निर्माण, और धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है। इसके खास औषधीय गुण हैं जो आयुर्वेद के लिए महत्वपूर्ण हैं। खैर की छाल में एंटीसेप्टिक व सूजन-रोधी गुण होते हैं जो मुंह के छालों, त्वचा रोगों और घावों को ठीक करने के काम आते हैं। खैर की लकड़ी को भी पवित्र माना जाता है। यज्ञ-हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में इसका इस्तेमाल होता है।