सभी किसानों को नहीं है पंजीकरण की जानकारी
नूंह। अपनी फसल को सरकारी न्यूनतम मूल्य पर बेचने के लिए फसल का पंजीकरण कराने में किसानों के पसीना छूट रहे हैं। आरोप है कि गांवों के कॉमन सर्विस सेंटर केवल कागजों में हैं, इन पर कहीं कोई मौजूद नहीं होता जिनसे जानकारी ली जा सके। ऐसे में किसान कहां और कैसे अपनी फसल का पंजीकरण कराए। किसानों का कहना है कि इस बाबत जानकारी हासिल करने जब किसान कृषि विभाग में आते हैं तो यहां भी अधिकारी नदारद रहते हैं। इस वजह से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ज्यादातर किसानों को इस बारे में अभी तक पूरी जानकारी भी नहीं है। कृषि विभाग भी फिलहाल कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। छपेड़ा के किसान महेंद्र सिंह का कहना है कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग में भी वे गए थे लेकिन वहां उन्हें कोई अधिकारी नहीं मिला। इसके पहले बाजरे की फसल की पंजीकरण प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। यही हाल रहा तो इसमें भी परेशानी होगी।
आलदोका के सुखीराम देशवाल का कहना है कि सरकार रोजाना नए फरमान जारी कर रही है। किसान पहले ही परेशान व हताश हैं। जिन कॉमन सर्विस सेंटरों पर सरकार पंजीकरण की बात कर रही है वो केवल कागजों में है। ऐसे में किसान क्या करें।
जगदेव एडवोकेट का कहना है कि किसान परेशान हैं। सबसे पहले तो पंजीकरण की तिथि बढ़ाई जाए और कॉमन सर्विस सेंटर के अलावा अन्य केंद्रों पर भी पंजीकरण की सुविधा दी जाए। कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारी गांवों में जाकर किसानों को इसकी जानकारी दें।