एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल शनिवार को 12वें दिन भी जारी रही। सबसे पहले धरने पर बैठे लोगों ने शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए दो मिनट का मौन रख कर उनके लिए दुआ मांगी। सभी ने कहा कि देश से बड़ा कोई मजहब नहीं होता।
हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं, जहां कई वार्ड बंद रहे वहीं ओपीडी में नाम मात्र के मरीज आए जो आए भी उन्हें जांच करवाने में काफी परेशानी हुई। इधर कर्मचारियों ने कहा कि हमें कार्य का वाजिब मेहनताना नहीं दिया जाता। हमारी मजबूरी है कि हमें लगातार हड़ताल पर बैठकर रोष जताना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत कक्ष में लोग कार्ड बनवाने के लिए नहीं आ रहे हैं, जबकि हड़ताल से पहले सैकड़ों की संख्या में लोग आया करते थे। जिला कमेटी प्रधान अनुपमा, उपप्रधान साहून ने बताया कि सरकार एनएचएम कर्मियों की हड़ताल को अनुचित बता रही है। हड़ताल शुरू करने से पहले उन्होंने सरकार से बातचीत के लिए कई बार समय मांगा गया लेकिन सरकार व मंत्रियों के पास समय नहीं है।
उपप्रधान कमला देवी ने कर्मचारियों के निलंबन की कड़ी निंदा की और सवाल किया कि अधिकारियों के मंत्रियों के बच्चे उनसे किसी चीज की मांग करते हैं तो क्या वे अपने बच्चों को घर से निकाल देते हैं। हमारी मांग जायज है।
उन्होंने खुले मंच से चेतावनी दी कि सरकार चाहे कुछ भी कर ले अबकी बार हमारी आवाज सुननी पड़ेगी, हमें सेवा सुरक्षा देनी होगी। उपस्थित सभी कर्मचारियों ने अनशन कर रोष जताया।