फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक ही जेल में मिले 46 एचआईवी पीड़ित कैदी, खून की जांच से मची खलबली 

Thu, 21 Apr 2016 12:23 PM IST
सौम्य मिश्र/अमर उजाला, नोएडा

सार

  • लुक्सर में एक से 31 मार्च तक 2200 कैदियों की हुई थी ब्लड की जांच
  • स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा निर्देश पर जेलों में कराई गई थी जांच
विज्ञापन
Jail
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ग्रेटर नोएडा स्थित लुक्सर जेल में 19 कैदियों में एचआईवी की पुष्टि हुई है। इनकी उम्र 20 से 24 साल के करीब है। जिला अस्पताल के एचआईवी परामर्श एवं जांच केंद्र की टीम ने कैदियों के ब्लड के नमूनों की जांच की थी।
विज्ञापन


टीम को चिंता इस बात की भी है कि जेलों में लड़ाई झगड़े होते हैं, जिससे लगने वाली चोटों के जरिए संक्रमण एक से दूसरे कैदी को मिल सकता है। गाजियाबाद डासना जेल में करीब 46 कैदियों में एचआईवी की पुष्टि हुई है।

एचआईवी परामर्श एवं जांच केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक लुक्सर जेल में 1 मार्च से 31 मार्च तक करीब 2000 कैदियों के ब्लड के नमूनों की जांच की गई थी, जिनमें से 19 कैदियों में एचआईवी की पुष्टि हुई है।
विज्ञापन


ब्लड की यह जांच स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा निर्देशों के आधार पर देश के तमाम जेलों में बंद कैदियों की कराई गई थी, जिसमें गौतमबुद्ध नगर भी शामिल था।

किसी को नहीं पता कैसे जेल में पहुंचा एचआईवी

जेल
एचआईवी परामर्शदाता मनोज कुमार ने बताया कि  मरीजों की अभी काउंसलिंग नहीं हुई है। इस कारण यह पता नहीं लग सका है कि उन्हें एचआईवी का संक्रमण कहां से मिला।

उन्होंने बताया कि टीम की ओर से मरीजों की एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी (एआरटी) के लिए जेल प्रशासन को कहा गया है। परामर्शदाता ने कहा कि जेल में कैदियों के बीच लड़ाई झगड़े होते रहते हैं, जिसमें चोटें भी लगती हैं। ऐसे में खून के जरिए संक्रमण दूसरे मरीजों को मिल सकता है।

जेल प्रशासन को एचआईवी पॉजिटिव रोगियों के खास ख्याल के लिए कहा गया है। साथ ही यूपी एड्स कंट्रोल सोसायटी को भी जानकारी भेज दी गई है। डासना जेल के आंकड़े भी उनके पास हैं, जिसके मुताबिक करीब 46 कैदियों में एचआईवी की पुष्टि हुई है।
विज्ञापन

12 हफ्ते बाद पता लगता है संक्रमण

जेल
कैसे होता है एचआईवी
-असुरक्षित यौन संबंध बनाना।
-एचआईवी संक्रमित ब्लड चढ़ने से।
-संक्रमित मां से होने वाले बच्चे को।
-यदि संक्रमित ब्लड किसी अन्य व्यक्ति के संपर्क में आ जाए।
-संक्रमित सुई से टैंटू बनवाने से।

12 हफ्ते बाद पता लगता है संक्रमण
मनोज कुमार ने बताया कि एचआईवी वायरस को शरीर को कवर करने में 12 हफ्ते लग जाते हैं। ऐसे में 12 हफ्ते बाद ही जांच में एचआईवी संक्रमण का पता लगता है।

एचआईवी से दो की मौत
एचआईवी परामर्श केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक अप्रैल 2015 से मार्च 2016 तक जिले में एचआईवी के 69 मरीजों की पुष्टि हुई है जबकि दो की मौत हो गई है। दोनों पुरुष थे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें