वाजपेयी ने भारतीय राजनीति में छोड़ी अमिट छाप : अमित शाह
अटल जी ने अपने तप और अथक परिश्रम से पार्टी को सींचकर एक वट वृक्ष बनाया और भारतीय राजनीति में अमिट छाप छोड़ी। अटल जी एक ऐसे लोकप्रिय राष्ट्रीय नेता के तौर पर उभरे जो सत्ता को सेवा का माध्यम मानते थे। राष्ट्रीय हितों से समझौता किए बिना बेदाग राजनीतिक जीवन जिया। इसलिए लोग राजनीतिक और सामाजिक सीमाओं से परे उन्हें प्यार और सम्मान करते हैं। एक महान राजनेता, प्रखर वक्ता, कवि और देशभक्त का निधन न केवल भाजपा के लिए बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है। अटल जी के विचार, कविताएं, दूरदर्शिता और राजनीतिक कौशल हमेशा सभी का मार्गदर्शन करेगा। एक तरफ तो अटल जी ने विपक्ष की पार्टी के प्रमुख के रूप में आदर्श विपक्ष की भूमिका निभाई, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री के रूप में देश को निर्णायक नेतृत्व प्रदान किया। वाजपेयी ने अपने विचारों और सिद्धांतों से भारतीय राजनीति में एक अलग पहचान बनाई।
- भाजपा अध्यक्ष ने ये विचार ट्वीट कर जाहिर किए
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शाह ने ब्लॉग में लिखा- वाजपेयी देश की राष्ट्रीयता के प्राणतत्व थे
अटल बिहारी वाजपेयी इस देश की राष्ट्रीयता के प्राणतत्व थे। भारत क्या है, अगर इसे एक पंक्ति में समझना हो तो अटल बिहारी वाजपेयी का नाम ही काफी है। वह लगभग आधी शताब्दी तक हमारी संसदीय प्रणाली के बेजोड़ नेता रहे। अपनी वाकपटुता से वह लोगों के दिलों में बसते थे। उनकी वाणी पर सरस्वती विराजमान थी। वह उदारता के प्रणेता थे। देश के सवा सौ करोड़ से ज्यादा लोगों के अटल जी यानी अटल बिहारी वाजपेयी हमारी इस राजनीति से कहीं ऊपर थे। मन, कर्म और वचन से राष्ट्रवाद का व्रत लेने वाले वह अकेले राजनेता थे। देश हो या विदेश अपनी पार्टी हो या विरोधी दल सभी उनकी प्रतिभा के कायल थे। सिर्फ 20वीं सदी के ही नहीं वे 21वीं सदी के भी सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय वक्ता रहे।
वह समता समरसता की अलख जगाने वाले साधक थे। वह एक ऐसे युग मनीषी थे, जिनके हाथों में काल के कपाल पर लिखने, मिटाने का अमरत्व था। पांच दशक के लंबे संसदीय जीवन में देश की राजनीति ने इस तपस्वी को सदैव पलकों पर बैठाए रखा। एक ऐसा तपस्वी जो आजीवन राग-अनुराग और लोभ-द्वेष से दूर राजनीति को मानव सेवा की प्रयोगशाला सिद्ध करने में लगा रहा।
अटल जी का जीवन आदर्शमयी प्रतिभा का ऐसा इंद्रधनुष था जिसके हर रंग में मौलिकता की छाप थी। पत्रकार का जीवन जिया तो उसके शीर्षस्थ प्रतिमानों के हर खांचे पर कुंदन की तरह खरे उतरे। राष्ट्र धर्म, वीर अर्जुन, पांचजन्य जैसे पत्रों को उनकी प्रमाणिकता और लोकप्रियता के शिखर तक पहुंचाया। कवि की भूमिका अपनाई तो उदारमना चेतना की समस्त उपमाएं बौनी कर दीं। अंत:करण से गाया। श्वासों से निभाया।