अंबेडकरनगर। जनवरी 2025 से अक्तूबर 2025 तक साइबर ठगी के 39 मामले सामने आए हैं। इस अवधि में करीब दो करोड़ रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी हुई, जिसमें से 1 करोड़ 32 लाख 65 हजार रुपये होल्ड कराए गए। इसके सापेक्ष अब तक केवल 19 लाख रुपये की राशि खातों में वापस कराई जा सकी।
साइबर अपराधी आमजन को ठगी का शिकार बनाने में दिन-ब-दिन और चालाक हो रहे हैं। इंटरनेट, सोशल मीडिया और अन्य स्रोतों से लाभार्थियों के मोबाइल नंबर हासिल कर, अपराधी उन्हें फोन कर आधार नंबर, बैंक खाता और अन्य संवेदनशील जानकारियां मांगते हैं। जागरूकता की कमी के कारण लोग इन जालसाजों के झांसे में आकर ठगे जाते हैं।
साइबर अपराध के मामलों में फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म से युवतियों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक करना, हनी ट्रैप और एपीके फाइल के जरिए ठगी के मामले भी शामिल हैं। पुलिस ने अब तक 2158 संदिग्ध मोबाइल नंबरों को बंद कराया है।रकम वापसी के लिए कोर्ट से आदेश मिलना आवश्यक है। इसमें देरी होने के कारण ही ज्यादातर मामलों में अभी रकम खातों में वापस नहीं कराई जा सकी है।
डिजिटल अरेस्ट कर ठगे आठ लाख
सम्मनपुर के एक गांव की शिक्षिका के पास दो माह पूर्व साइबर जालसाज का फोन आया था, जिसके बाद ठगों ने उनको डरा धमकाकर उनको डिजिटल अरेस्ट कर लिया। इसके बाद उनके खाते से आठ लाख रुपये की ठगी कर ली थी। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर रकम होल्ड करा दी थी।
एपीके फाइल भेज लोगों को रहे ठग
मालीपुर के शिक्षक राकेश कुमार के मुताबिक उनके मोबाइल पर बृहस्पतिवार को खाते का केवाईसी करने के लिए मेसेज आया। उसमें एपीके फाइल को मोबाइल में डाउनलोड करने के लिए कहा गया। फाइल डाउनलोड करने के कुछ देर बाद ही उनके खाते से 50 हजार रुपये कट गए। इसके बाद वह सीधे साइबर थाने पहुंचे। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों की मदद से रुपये होल्ड कराए गए।
साइबर ठगी का शिकार होने पर टोलफ्री नंबर 1930 पर सूचित करें। जिले में साइबर क्राइम से संबंधित किसी भी समस्या के लिए साइबर थाना के मोबाइल नंबर 7839855004 पर सूचना दें सकते हैं। सभी प्रकरणों में नियमित कार्रवाई की जा रही है। रकम वापसी के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
- अभिजीत आर. शंकर, पुलिस अधीक्षक