बंगाणा (ऊना)। मानसून सीजन में हुई भारी बारिश के चलते बंगाणा उपमंडल में मक्की की बिजाई काफी प्रभावित हुई है। इस बार 51.50 हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों ने मक्की की बिजाई की थी। इनमें से 25 फीसदी सुंडी रोग और 35 फीसदी फसल बारिश की वजह से खराब हो गई है। इसके अलावा जंगली जानवरों ने भी काफी क्षेत्र में फसल बर्बाद कर दी है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। उपमंडल में फसल को हुए नुकसान को लेकर विभाग ने रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी है। डीआईएमएस पोर्टल के तहत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। कृषि विभाग का कहना है कि किसान खुद भी नुकसान की रिपोर्ट जेपीएस पोर्टल पर अपलोड कर विभाग के समक्ष दे सकते हैं। मौसम साफ होने के बाद किसानों ने अब फसल को इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। किसानों की मानें तो इस बार काफी नुकसान हुआ है। पहले जो फसल 10 से 15 क्विंटल रहती थी। इस बार मुश्किल से 50 किलो से लेकर दो क्विंटल तक निकल रही है। ऐसा ही हाल रहा तो किसान खेती-बाड़ी से मुंह मोड़ कर दिहाड़ी मजदूरी पर मजबूर हो जाएंगे। फसल बिजाई के बाद उसकी देखरेख पर जो खर्चा हुआ है। वह भी नहीं निकल पा रहा है।
मैंने बड़ी मुश्किल से महंगे बीज खरीद कर बिजाई की थी। खाद, खरपतवार नाशक दवाइयों सहित अन्य खर्च भी किया गया लेकिन इस बार हुई बारिश से सब कुछ तबाह हो गया है।
- राधेश्याम, स्थानीय किसान
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दिन-रात खेतों में ठीकरी पहरा देने के बावजूद पहले कुदरती मार पड़ गई। अब जंगली जानवरों और बंदरों ने फसल तबाह कर दी है। इससे चिंता बढ़ गई है।
- जोगिंद्र सिंह, किसान
फसल में आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया की कहावत सिद्ध हो रही है। इसलिए अब मन बना रहे हैं कि अगली बार मक्की की फसल की बिजाई नहीं करेंगे। इससे अच्छा है कि पैसे देकर आटा खरीदकर गुजारा कर लेंगे।
- विनोद शर्मा, स्थानीय किसान
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शनिवार को धूप निकलने से थोड़ी राहत जरूर मिली है लेकिन लगातार तीन महीनों में बारिश ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया है। अब तो दस प्रतिशत ही फसल बची है, बाकी सब कुछ खत्म हो गया है।
- नरेंद्र ठाकुर, स्थानीय किसान
उपमंडल में फसल को हुए नुकसान को लेकर आकलन रिपोर्ट डीआईएमएस पोर्टल पर तैयार की जा रही है। किसान भी नुकसान की रिपोर्ट विभाग के पास भेज सकते हैं। उपमंडल में 51.50 हेक्टेयर में बिजाई हुई थी।
-डॉं सतपाल धीमान, कृषि विषयवाद विशेषज्ञ