बकाया नहीं दिया, 2281 बैंक खाते सीज
नोएडा। बकायेदारों से निपटने के लिए राज्य वस्तु एवं सेवाकर (एसजीएसटी) ने सख्ती तेज कर दी है। छह महीने में असेसमेंट के आधार पर 2281 बकायेदारों पर एकपक्षीय रूप से टैक्स निर्धारण के आदेश दिए जा चुके हैं। इन उद्यमी-व्यापारियों के बैंक खातों को सीज कर विभाग ने 53.59 करोड़ रुपये की टैक्स की वसूली की है। अधिकारियों का कहना है कि बार-बार नोटिस दिए जाने के बाद भी टैक्स का भुगतान न करने वालों पर सख्ती जारी रहेगी। वहीं, उद्यमी संगठनों ने नाराजगी जताते हुए यह मामला शनिवार को उद्योग बंधु की बैठक में भी उठाया है।
विभाग के हर खंड के अधिकारी ही खाते सीज करने का आदेश पारित करते हैं और इसे दोबारा चालू करने के आदेश भी जांच के बाद वही जारी करते हैं। वित्तीय वर्ष की समाप्ति का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है विभाग ने बकाया वसूली के लिए सख्ती शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि टैक्स निर्धारण से पहले सुनवाई के लिए कम से कम दो से तीन बार नोटिस जारी किए जाते हैं। अंतिम सुनवाई तिथि पर उपस्थित न होने पर संबंधित कारोबारी के मामले में एक पक्षीय आदेश (एक्स पार्टी केस) पारित कर दिया जाता है। इसके 45 दिन बाद रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। विभाग को भू-राजस्व की तरह कर बकाया वसूली का अधिकार प्राप्त है जिसके तहत बैंक खाते अटैच किए जाते हैं। संपत्ति की कुर्की भी की जा सकती है।
एक माह में 215 खाते सीज
राज्य जीएसटी विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है। नवंबर की कार्रवाई के आंकड़े तैयार नहीं है, लेकिन अक्तूबर के महीने में ही रेंज में 215 बैंक खातों को सीज किया जा चुका है, जिनसे 1.74 करोड़ रुपये वसूले गए हैं। विभाग बैंकों से चेक या ड्राफ्ट आदि के माध्यम से खाते में जमा रकम को निकलवा लेता है। बैंकों की तरफ से नोटिस मिलने पर बकायेदारों को जानकारी मिलती है।
एजेंट बिगाड़ रहे मामला
दरअसल, जीएसटी रिटर्न भरने की पूरी प्रक्रिया अब ऑनलाइन हो गई है। अधिकांश कारोबारी टैक्स से जुड़े एजेंट के माध्यम से रिटर्न फाइल जमा करवाते हैं। ऐसे में एजेंट अपना ही मोबाइल फोन नंबर और ई-मेल फॉर्म में अपटेड कर देते हैं। विभाग की तरफ से सूचना या फिर नोटिस भेजे जाने पर कारोबारियों को पता नहीं चलता। कार्रवाई होने पर जानकारी मिलती है।
बकाया टैक्स वसूलने का अभियान लगातार चलाया जा रहा है। नियमानुसार विभाग की तरफ से कार्रवाई की जा रही है। अपील के बाद सेक्टर अधिकारी खाते चालू भी कराते हैं। बशर्ते यह स्पष्ट हो जाए कि कारोबारी हिसाब-किताब चुकता करने को तैयार हैं।
- विनय, प्रभारी अतिरिक्त आयुक्त-राज्य जीएसटी