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चमकेगा एक्सप्रेसवे, अंडरपास देंगे राहत

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चमकेगा नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे, अंडरपास से मिलेगी राहत
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- आचार संहिता खत्म होते ही शुरू होगा एक्सप्रेसवे का काम
- टेंडर प्रक्रिया होगी पूरी, बनेंगे चार अंडरपास

न्यूमेरिक्स
- 23 किमी है एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई
- 80 फीसदी मैटेरियल दोबारा होगा प्रयोग
सुशील पांडेय
नोएडा। नोएडा-ग्रेटर नोएडा के बीच बने 23 किमी के एक्सप्रेसवे का शीघ्र ही कायाकल्प होगा। एक्सप्रेसवे की पूरी सड़क को दोबारा बनाया जाएगा। वहीं, उसके नीचे बनने वाले 4 अंडरपास आसपास के सेक्टरों के लोगों को राहत देंगे। आचार संहिता की समाप्ति के बाद इन कार्यों की शुरुआत होगी। अभी इनका टेंडर प्रक्रिया में है।

दोबारा बनेगा पूरा एक्सप्रेसवे
नोएडा प्राधिकरण की ओर से बने एक्सप्रेसवे को फिर से बनाया जाएगा। चुनाव आचार संहिता लगने से इसका काम फंस गया था। अलग-अलग एजेंसियों ने एक्सप्रेसवे का सर्वे का काम पूरा कर लिया है। साथ ही अनुमानित बजट का आंकलन किया गया है। वहीं, एक्सप्रेसवे के री-सर्फेसिंग के दौरान सड़कों उखाड़कर उसमें से 80 प्रतिशत मैटेरियल का दोबारा उपयोग किया जाएगा। इससे प्राधिकरण पर खर्चे का दबाव भी नहीं बनेगा।
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2020-21 तक पूरा होगा अंडरपास का काम
1- पहले अंडरपास का निर्माण जीरो माइल से 2.36 किलोमीटर पर बॉक्स पुशिंग तकनीक से होगा। जिसका बजट 97.67 करोड़ है और इसका काम 31 दिसंबर 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अंडरपास का टेंडर प्रक्रिया में है।
2- दूसरा अंडरपास जीरो माइल से 19.400 किलोमीटर पर अंडरपास का निर्माण प्रस्तावित है। इसकी अनुमानित लागत 45.41 करोड़ आंकी गई है। अंडरपास का काम 31 मार्च 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। टेंडर प्रक्रिया में है।
3- तीसरा अंडरपास जीरो माइल से 10.300 किलोमीटर पर अंडरपास निर्माण प्रस्तावित है। इसकी लागत 43.64 करोड़ होने का अनुमान है। इसका काम 31 मार्च 2021 तक होने की संभावना है। टेंडर प्रक्रिया में है।
4- चौथा अंडरपास जीरो माइल से 16.400 किलोमीटर पर अंडरपास बनेगा। इसकी लागत 45.54 करोड़ आंकी गई है। इसका काम 31 जुलाई 2021 तक होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। अंडरपास का टेंडर प्रक्रिया में है।

आसपास के सेक्टरों को होगा फायदा
एक्सप्रेसवे के नीचे चार-चार अंडरपास बनने से आसपास के सेक्टरों को फायदा होगा। वर्तमान में सेक्टरों के निवासियों को एक्सप्रेसवे के दूसरे कैरेज पर जाने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनको कई किलोमीटर तक आगे जाकर पहले से बने अंडरपास के सहारे रास्ता पार करना पड़ता है। इसके बाद वह एक्सप्रेसवे के दूसरे कैरेज पर पहुंच पाते हैं। लेकिन शीघ्र से लोगों को इस समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।
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मेट्रो स्टेशनों को भी होगा फायदा
नोएडा-ग्रेनो के बीच मेट्रो की एक्वा लाइन भी शुरू हुई है। लेकिन कुछ स्टेशनों पर अभी राइडरशिप की कमी है। इसकी वजह कनेक्टिविटी का नहीं होना भी है। ऐसे में अगर एक्सप्रेसवे पर चार स्थानों पर अंडरपास का निर्माण होता है तो उससे नजदीकी स्टेशनों को भी कनेक्टिविटी का मौका मिलेगा।
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