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90 दिन बचे, कैसे चलेंगी 90 सिटी बसें

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90 दिन बचे, कैसे चलेंगी 90 सिटी बसें
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फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर में 31 मार्च, 2019 तक सिटी बस सेवा शुरू की जानी है। सेवा शुरू किए जाने में 90 से भी कम दिन बचे हैं, लेकिन अभी तक कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है। बसों की व्यवस्था तो दूर, इसके लिए जरूरी आधारभूत ढांचा भी अभी तैयार नहीं किया गया है।

चार चरण में पूरी होगी परियोजना
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत आधुनिक एसी सिटी बस सेवा शुरू किए जाने की घोषणा अगस्त 2018 में की गई थी। पूरे शहर में चार चरणों में बस सेवा का जाल फैलाने की परियोजना तैयार की गई थी। इसके तहत 2018-19 से वर्ष 2031 तक शहर में 595 एसी, नॉन एसी बसें चलाई जानी हैं। बस सेवा के लिए आधारभूत ढांचे के रूप में सात डिपो, छह बस टर्मिनल, 460 बस क्यू शेल्टर, 6 कंट्रोल रूम और 6 सीएनजी स्टेशन स्थापित किए जाने हैं। इसका पहला चरण आधार वर्ष 31 मार्च 2019 तक पूर्ण होना है।
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पहले चरण को आधार वर्ष नाम दिया
अगस्त 2018 में घोषित की गई स्मार्ट सिटी बस सेवा के पहले चरण को आधार वर्ष नाम दिया गया है। आधार वर्ष में 31 मार्च, 2019 तक 90 सिटी बसें चलाई जानी हैं। इन बसों के लिए दो बस डिपो, दो बस टर्मिनल, 310 बस क्यू शेल्टर, 2 कंट्रोल रूम ओर दो सीएनजी स्टेशन स्थापित किए जाने हैं। आधार वर्ष की समाप्ति को मात्र 88 दिन बचे हैं, लेकिन अभी आधारभूत सुविधाओं का कुछ पता नहीं है। आरटीआई एक्टिविस्ट एंड सिटिजन वॉयस के महासचिव रवींद्र चावला कहते हैं कि अभी बस डिपो और टर्मिनल के लिए जरूरी करीब 13 एकड़ में अधिकतर जमीन खोजी ही नहीं जा सकी है। तीन माह में यदि जमीन मिल भी गई तो यह बनाकर तैयार किए जा सकेंगे इस पर संदेह है।

बसों की भी नहीं हुई व्यवस्था
स्मार्ट सिटी में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत आधार वर्ष में 90 बसें चलाई जानी हैं। इनमें 40 बसें मेट्रो फीडर के रूप में और 50 बसें सिटी बस के रूप में चलाई जानी हैं। इन बसों में टिकट काटने के लिए 225 इलेक्ट्रॉनिक वेंडिंग मशीन भी खरीदी जानी हैं। स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से अभी तक बसों के लिए कोई निविदा प्रक्रिया नहीं शुरू की गई है।
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खर्च होने हैं 104.11 करोड़ रुपये
स्मार्ट सिटी बस सेवा शुरू करने के लिए आधार वर्ष में 104.11 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 59 करोड़ रुपये आधारभूत सुविधाओं (जमीन, इमारत आदि) पर, 38.75 करोड़ रुपये बसों का बेड़ा और इलेक्ट्रॉनिक टिकट वेंडिंग मशीन, 40 लाख रुपये सहायक वाहनों पर खर्च होंगे। 5.96 करोड़ रुपये अन्य विभिन्न मदों में खर्च किए जाने हैं। रवींद्र चावला कहते हैं कि बिना सटीक कार्य योजना के मात्र तीन माह में 104.11 करोड़ रुपये खर्च किए गए तो वह बर्बाद ही होंगे। जेएनएनयूआरएम में 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए और यह सब बसें आज कबाड़ में खड़ी हैं।

सिटी बस सेवा को जल्द शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। जल्द ही काम शुरू किया जाएगा।
- एनके कटारा, सलाहकार, फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड



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