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स्पोर्ट्स सिटी के लिए 20 बिल्डरों का प्लान प्राधिकरण पहुंचा

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नोएडा। स्पोर्ट्स सिटी परियोजना को पूरा करने के लिए बिल्डरों का समूह अपनी योजना प्राधिकरण में जमा करा रहा है। इसी कड़ी में लोटस की ओर से प्राधिकरण में प्लान जमा किया गया है। इसमें करीब 25 छोटे-छोटे प्रोजेक्ट और 20 बिल्डर हैं, जो परियोजना को पूरा करने का वादा कर रहे हैं।
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अधिकारियों ने बताया कि सेक्टर-150, 78, 79 समेत अन्य स्थानों पर स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में खेल सुविधाएं विकसित कराने को लेकर बिल्डरों की ओर से योजना प्राधिकरण में जमा कराई जा रही है। इसी कड़ी में एक बिल्डर की ओर से प्राधिकरण को बताया गया है कि उसके प्रोजेक्ट में खेलों की सुविधाएं कैसे विकसित की जाएंगी।
प्राधिकरण के अधिकारी का कहना है कि इस परियोजना को करीब 25 छोटे-छोटे प्रोजेक्ट में तोड़ दिया गया है। इन प्रोजेक्टों को 20 बिल्डर पूरा कराएंगे। कौन से बिल्डर कहां और कौन सी खेलों सुविधा तैयार करेंगे, इसका जिक्र भी योजना में किया गया है। इसी तरह से दूसरे अन्य बिल्डरों की ओर से भी खेल सुविधाएं विकसित करने को लेकर प्लान जमा किया जा रहा है। प्राधिकरण के अधिकारी ने बताया कि इसमें एटीएस, एस, प्रतीक, एल्डेको, गोदरेज समेत कई डेवलपर्स कंपनियां शामिल हैं।
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बिल्डर कर रहे वादाखिलाफी, नहीं लगा रहे रजिस्ट्री शिविर
मुख्य सचिव आरके तिवारी के सामने बीते दिनों हुई बैठक में बिल्डरों ने सामान्य ब्याज पर बकाया जमा करने के लिए हामी भरी थी, लेकिन अब वादाखिलाफी कर रहे हैं। अब तक केवल दो बिल्डरों ने ही रजिस्ट्री शिविर के लिए आवेदन किया है। इस मामले में प्राधिकरण के साथ बिल्डरों की कई बार बैठक भी हो चुकी है, लेकिन बकाये चुकाने को लेकर कोई बात नहीं बन पाई है। ऐसे में बिल्डरों की ओर से रजिस्ट्री के लिए शिविर लगाने का वादा हवा-हवाई साबित हो रहा है। प्राधिकरण की ओर से फ्लैटवाइज रजिस्ट्री का ऑफर दिया गया है। बिल्डरों से कहा जा रहा है कि उनकी गणना सामान्य ब्याज पर करने के बाद कुल बकाये की 25 प्रतिशत राशि जमा करा दें, लेकिन अब तक किसी ने भी इस ऑफर को नहीं लिया। दो बिल्डरों ने ही फ्लैटवाइज रजिस्ट्री के लिए आवेदन किया है। इसमें कुल चार प्रोजेक्ट की कई यूनिट शामिल हैं। बिल्डर की ओर से बाद में बताया जाएगा कि कितने फ्लैटों की रजिस्ट्री कराई जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कर रहे इंतजार
सूत्रों की मानें तो बिल्डर आगामी 22 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। संभावना है कि कोर्ट की ओर से कुछ फैसला सुनाया जाएगा। इसमें यह भी पता चलेगा कि बिल्डरों को कितने प्रतिशत पर ब्याज की राशि देनी होगी। वहीं, प्राधिकरण के सूत्रों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में फैसला आने के बाद भी मामले का बोर्ड बैठक में जाना निश्चित है। इतनी बड़ी वित्तीय स्थिति पर बोर्ड के मंथन के बाद ही आगे की कार्यवाही की उम्मीद है। इस बारे में बोर्ड बैठक की तिथियों की कभी भी घोषणा की जा सकती है।
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