हेडिंग: स्थानीय कांग्रेसी नहीं चाहते, लोकसभा में गठबंधन
सबहेड: भाजपा को घेरने के लिए शीर्ष स्तर की मजबूरी बन गया है समझौता
सपा निकली सबसे आगे, गठबंधन होगा तब होगा, प्रत्याशी उतार दिए
सपा किसी जल्दबाजी में नहीं, हालात का इंतजार कर रही पार्टी
एसएस अवस्थी
नोएडा। यूपी का शो विंडो कहे जाने वाला जिला गौतमबुद्धनगर राजनीतिक तौर से काफी महत्व रखता है। मौजूदा समय में गौतमबुद्धनगर लोकसभा में सांसद से लेकर नोएडा, दादरी, जेवर, खुर्जा व सिकंदराबाद पांचों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। अब लोकसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में पार्टियां अपने-अपने स्तर से भाजपा को हराने की तैयारी में जुटी हुई हैं।
लोकसभा चुनाव में भाजपा को घेरने में शीर्ष स्तर पर नेता भले ही कह रहे हैं कि गठबंधन जरूरी है, लेकिन स्थानीय स्तर के नेता दबी जुबान से कह रहे हैं कि इससे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में मायूसी आएगी। तमाम नेता टिकट की लाइन में हैं, वह बाहर हो जाएंगे। जोश खत्म हो जाएगा। स्थानीय स्तर पर पार्टी को नुकसान हो सकता है। जबकि पार्टी में विचार विभाग के संयोजक तरुण भारद्वाज की मानें तो मौजूदा समय में सभी विपक्षी पार्टियां चाहती हैं कि भाजपा को रोकना है। इस लिहाज से शीर्ष नेतृत्व गठबंधन की तैयारी में है। यह समय की मांग भी है।
मायावती की हां में हां मिलाने में कोई पीछे नहंीं
भले ही लोकसभा में बसपा का एक भी सांसद न हो, लेकिन राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते बसपा सुप्रीमो मायावती की हां में हां मिलाने में कोई पार्टी पीछे नहीं है। कांग्रेस, सपा या अन्य स्थानीय स्तर की पार्टियां मानती हैं कि बसपा से गठबंधन का फायदा देगा। उत्तर प्रदेश के उप चुनावों व कर्नाटक विधानसभा के नतीजों से पूरे देश में बसपा की अहमियत बढ़ चुकी है। मायावती ने अपने गृह जनपद गौतमबुद्धनगर लोकसभा सीट से पार्टी प्रत्याशी विरेंद्र डाढ़ा को साल के शुरू से ही मैदान में उतार दिया है। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा ने बताया कि पूरे प्रदेश के हर जिले में भाईचारा व बूथ स्तर पर सम्मेलन शुरू हो चुके हैं।
सपा आज की नहीं, दूर की सोच रही
प्रदेश में गठबंधन की शुरुआत सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ही की थी। इसका असर यह हुआ कि पूरे देश में राजनीति दलों के बीच गठबंधन करना मजबूरी हो गया है। पार्टी चाहती है कि गठबंधन के सहारे पहले वह राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करें। रही बात गौतमबुद्धनगर में स्थानीय स्तर पर नेता की तो आज की स्थिति में उनके पास गुर्जर बिरादरी के बड़े नेता राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर हैं। गौतमबुद्धनगर लोकसभा से वह पहले सांसद भी रह चुके हैं। यहां से गठबंधन में उनकी मजबूत दावेदारी मानी जा रही है। सुरेंद्र सिंह नागर ने कहा है कि वह तैयार हैं, बस अखिलेश यादव के इशारे का इंतजार है।