हेडिंग: आबादी बैकलीज में गड़बड़ी की शासन से हो सकती है जांच
सबहेड: ग्रेनो प्राधिकरण के चेयरमैन रह चुके डॉ. प्रभात कुमार की रिपोर्ट पर औद्योगिक विकास विभाग की हामी
उच्चस्तरीय कमेटी पर मुख्य सचिव से अप्रूवल का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। बसपा-सपा शासन काल में ग्रेटर नोएडा में हुए बैकलीज घोटाले की जांच शासन से गठित उच्चस्तरीय कमेटी कर सकती है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन रह चुके डॉ. प्रभात कुमार की सिफारिश पर मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास विभाग को जांच कराने को कहा है। विभाग ने पत्रावली तैयार कर मुख्य सचिव को भेज दिया है। वहां से अप्रूवल मिलते ही कमेटी गठित हो जाएगी।
दरअसल, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कई किसानों की कृषि जमीन के साथ ही आबादी भी अधिग्रहीत कर ली। उसे वापस पाने के लिए किसानों ने आंदोलन किया। शासन के निर्देश पर आबादी की जमीन वापस करने का निर्णय लिया गया। एक किसान को 3000 वर्ग मीटर तक जमीन देने का फैसला लिया। इस प्रावधान की आड़ में तमाम बाहरी लोगों ने जमीन खरीद ली। 40 हजार वर्ग मीटर तक की जमीन बैकलीज कर दी गई। कुछ किसानों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका डाली। कोर्ट ने बैकलीज के लिए नियमावली बनाने को कहा। शासन के निर्देश पर यह तैयार की गई।
दूसरी तरफ किसानों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार से जांच कराने की मांग की। डॉ. प्रभात ने अप्रैल 2017 में बिसरख के बैकलीज के कुछ प्रकरणों की जांच यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह को सौंपी। जांच में कई बैकलीज गलत मिली। बाहरी लोगों को मूल निवासी बनाकर बैकलीज की गई थी। उन्होंने जांच रिपोर्ट डॉ. प्रभात सौंप दी। उन्होंने इन प्रकरणों को रद्द करने और गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर कार्रवाई के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को लिखा है। साथ ही, शासन को पत्र भेजा कि बड़े पैमाने पर बैकलीज में धांधली हुई है। ऐसे में इसकी उच्चस्तरीय जांच कर ली जाए। मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास विभाग को कमेटी बनाकर जांच कराने के लिए कहा। विभाग ने प्रस्ताव मुख्य सचिव को भेज दिया है। मुख्य से अनुमति मिलते ही कमेटी गठित होगी और वही बैकलीज के सभी प्रकरणों की जांच करेगी। सूत्र बताते हैं, कि उच्चस्तरीय होने पर इस मामले में कई वरिष्ठ अधिकारी भी फंस सकते हैं।