आपराधिक न्याय प्रणाली में डॉक्टरों की महत्वपूर्ण भागीदारी : जस्टिस एके मित्तल
गुरुग्राम। आपराधिक न्याय प्रणाली में चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भागीदारी है। इनके बिना आपराधिक कानून प्रणाली प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर सकती। चिकित्सकों को भी कानून की मूलभूत जानकारी होना आवश्यक है। ये बातें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन जस्टिस अजय कुमार मित्तल ने कहीं। वह रविवार को सेक्टर-51 स्थित आर्टिमिस अस्पताल में आयोजित मेडिको लीगल लिटरेसी सेमिनार में पहुंचे थे।
यह सेमिनार जिला कानूनी विधिक सेवा प्राधिकरण, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, आर्टिमिस अस्पताल और दक्ष फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया गया। इसमें न्यायाधीशों सहित 140 वरिष्ठ चिकित्सकों और कानून की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों ने भाग लिया। सेमिनार में मुख्य तौर पर मेडिकल नेग्लिजेंसी, पीसी-पीएनडीटी एंड एमटीपी एक्ट- वर्तमान युग में प्रासंगिकता, डॉक्टरों के प्रति हिंसा व डॉक्टरों के उत्तरदायित्व आदि विषयों पर चर्चा की गई।
जस्टिस एके मित्तल ने कहा कि मौजूदा नीतियों व कानून के बीच के अंतर और ग्रास रूट लेवल पर समस्याओं को समझने के लिए कानून क्षेत्र से जुड़े पदाधिकारियों को इस पर खुलकर चर्चा करने की जरूरत है। जिससे की हर किसी को अपना अधिकार और फर्ज पता चल सके। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही की शिकायत पर अब पुलिस बिना जांच के उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। इसके लिए पुलिस को पहले सभी पहलुओं की जांच करनी होगी। उसके बाद अगर लापरवाही साबित होती है तभी डॉक्टर की गिरफ्तारी होगी। हर मामले में जांच के बाद ही लापरवाही के बारे में पता चल सकता है। इस अवसर पर आईएमए के प्रधान डॉ. दिनेश हंस ने चिकित्सकों के हक की बात रखते हुए सभी प्रक्रिया कानूनी ढंग से लागू करने की मांग की। इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव नरेंद्र कुमार व अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।