हेडिंग: साईं कृपा बाल गृह संस्था ने महिला आयोग की कार्रवाई पर उठाए सवाल
जांच के दौरान लड़कियों से मारपीट और अभद्रता करने का लगाया आरोप
मामले की शिकायत राष्ट्रीय महिला व बाल संरक्षण आयोग से करने का फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। साईं कृपा बाल गृह पर राज्य महिला एवं बाल आयोग की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बृहस्पतिवार को संस्था ने आरोपों को खारिज करते हुए आयोग की जांच टीम को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया। बाल गृह की संस्थापक अंजिना राजगोपाल ने जांच के लिए पहुंची टीम पर लड़कियों के साथ मारपीट व अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय महिला व बाल आयोग और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से करने का फैसला लिया है।
इसके अलावा जांच टीम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए डीएम व एसएसपी को भी शिकायत दी जाएगी। संस्थापक अंजना राजगोपाल ने पत्रकारों को बताया कि मंगलवार शाम करीब सात बजे महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह करीब 10-12 लोगों के साथ परिसर में पहुंचीं और बाल गृह में रहने वाली लड़कियों के कमरों की तलाशी शुरू कर दी। आरोप है कि बुधवार को भी जांच के नाम पर मानसिक रूप से लड़कियों को परेशान किया गया। लड़कियों के कमरों में पुरुष अधिकारियों ने अलमारियां से सामान फेंकना शुरू कर दिया और लड़कियों से अभद्रता भी की। इस दौरान विरोध करने पर कुछ लड़कियों को पीटा गया। बिना सोचे-समझे लड़कियों पर गंभीर आरोप लगाए जबकि सभी लड़कियां स्कूल और कॉलेज की छात्राएं हैं। करीब 30 साल से संस्था चलाई जा रही है। अचानक गैर कानूनी तरीके से कार्रवाई होने पर सभी आश्चर्यचकित हैं।
महिला मोर्चा का क्या काम
राजगोपाल ने बताया कि राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपने साथ महिला मोर्चा की महानगर अध्यक्ष डिंपल आनंद को लेकर जांच के लिए पहुंची थीं। डिंपल ने उनके व संस्था में रहने वाले बच्चों के साथ बदसलूकी की। महिला मोर्चा की पदाधिकारी पर मानहानि का दावा किया जाएगा। उधर, डिंपल आनंद का कहना है कि उन्होंने किसी से मारपीट नहीं की, मौके पर महिला सिपाही भी मौजूद थी।
नहीं दी जब्त सामान की सूची
राजगोपाल ने बताया कि एक शराब की खाली बोतल को लेकर लड़कियों पर गंभीर आरोप लगा दिए गए, जबकि बोतल पर 2016 की एक्सपायरी डेट लिखी हुई थी। कचरे से सजावट का सामान बनाने के लिए इस तरह की बोतल का इस्तेमाल लड़कियां अक्सर करती हैं। जांच प्रक्रिया के दौरान जब्त सामान की सूची देने का नियम है, लेकिन आयोग की टीम ने कोई सूची संस्था को नहीं सौंपी।
जांच के दौरान नहीं थी महिला पुलिस
संस्था की ओर से आरोप लगाया गया है कि बाल गृह में करीब 25 लड़कियां रहती हैं। अचानक जांच के लिए पहुंची टीम के साथ कोई महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद नहीं थी। लड़कियों से पूछताछ या तलाशी के लिए महिला पुलिस को शामिल नहीं किया गया। ऐसे में सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या इस जांच के लिए किसी ने दबाव तो नहीं बनाया था।