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गड्ढों ने ली 45 जान, फिर भी नहीं सुधरे हालात

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हेडिंग : गड्ढों ने ली 45 जान, फिर भी लापरवाही
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सबहेड: मानसून की शुरुआती बारिश ने ही बिगाड़कर रख दी सड़कों की सूरत

फैक्ट फाइल
2082 किमी है जिले में सड़कों की कुल लंबाई
1429 किमी है ग्रामीण सड़कों की कुल लंबाई
653 किमी है नगरीय सड़कों की कुल लंबाई


योगेश शर्मा
नोएडा। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने 15 जून 2017 तक प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त करने का दावा किया, लेकिन प्रदेश की शो विंडो की सड़कों के जख्म आज तक नहीं भरे हैं। जिला पुलिस की रिपोर्ट के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। साल 2017 में सड़कों के गड्ढों ने 45 जिंदगियां लील लीं। सड़कों की मरम्मत के नाम पर प्राधिकरण ने करोड़ों रुपया खर्च किए, लेकिन पुरानी गलतियों से सबक लेने की जरूरत नहीं समझी। मानसून की शुरुआती बारिश ने ही सड़कों की सूरत को बिगाड़कर रख दिया है।

क्या कहती है रिपोर्ट
जिला पुलिस की रिपोर्ट साल 2017 के सड़क हादसों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 1043 सड़क हादसे हुए, जिनमें 419 लोगों को जान गंवानी पड़ी। सड़कों पर गड्ढों की वजह से 74 हादसे हुए, जिनमें 45 लोगों की जान चली गई। इतना ही नहीं, निर्माणाधीन सड़कों और मरम्मत कार्य की वजह से भी 121 सड़क हादसे हुए और 65 लोगों ने जान गंवाई।
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सड़कों पर दिख रहे लापरवाही के सबूत
सड़कों की बदहाली भी ट्रैफिक के लिए किसी दुश्मन से कम नहीं है। शहर में जगह-जगह लापरवाही के सबूत देखे जा सकते हैं। कहीं सीवर के ऊंचे ढक्कन तो कहीं खराब सड़कें जाम की तो वजह बन ही रही हैं, राहगीरों के लिए जानलेवा भी साबित हो रही हैं। इसके बावजूद नोएडा प्राधिकरण की नींद नहीं टूट रही है। शहर में कई ऐसे मुख्य मार्ग हैं, जहां लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सेक्टर-11/12/56 चौराहा, वसुंधरा दिल्ली को नोएडा के सेक्टर-6 से जोड़ने वाला मार्ग, लेबर चौक, सेक्टर-63, फेस-2 सहित कई जगह लापरवाही के नमूने देखे जा सकते हैं।
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कार्रवाई क्यों नहीं
अट्टा बाजार व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सीबी झा कहते हैं कि सड़कों पर लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के खिलाफ प्राधिकरण आखिर कार्रवाई क्यों नहीं करता। अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनने वाली यह लापरवाही जानलेवा साबित होती हैं। ऐसे मामलों को अपराध मानते हुए संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जानी चाहिए।

कहां कितने हादसे
क्षेत्र दुर्घटना मौत
रिहायशी 144 53
इंस्टीट्यूशनल 150 69
बाजार, व्यावसायिक 202 81
(आंकड़े 2017 की रिपोर्ट पर आधारित)
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