फर्जी शिक्षकों के जरिये यूजीसी को धोखा नहीं दे पाएंगे संस्थान
नैक की ग्रेडिंग से पहले फैकल्टी के आधार नंबर की होगी जांच
पीएमओ ने क्रिसिल जैसी एजेंसी से डाटा के सत्यापन का प्रस्ताव
सीमा शर्मा
नई दिल्ली।
सभी उच्च शिक्षण संस्थान अब फर्जी फैकल्टी के नाम वेबसाइट पर डाल कर यूजीसी और छात्रों को धोखा नहीं दे सकेंगे। संस्थानों को नेशनल असेसमेंट एंड एक्रिडिटेशन काउंसिल (नैक) से गुणवत्ता की ग्रेडिंग से पहले शिक्षकों का आधार नंबर देना होगा। आधार नंबर के सत्यापन के बाद ही नैक टीम आगे बढ़ेगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने नैक के आवेदन विंडो पर मार्च से रोक लगा रखी है।
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय में पिछले दिनों नैक की तैयारियों का जायजा लेने के लिए बैठक आयोजित हुई थी। इस बैठक में प्रोफेशनल डाटा वेरिफिकेशन के लिए क्रिसिल जैसी एजेंसी का सहयोग लेने पर सहमति बनी, ताकि कहीं भी गड़बड़ी की आशंका न रहे। जांच टीम में आईआईटी को भी शामिल करने पर विचर चल रहा है।
सूत्रों का कहना है कि अधिकतर शिक्षण संस्थान वेबसाइट से लेकर पेपर पर जो फैकल्टी दिखाते हैं, उसमें पूरा सच नहीं होता। अब जब नैक की टीम शिक्षकों के नाम व आधार नंबर की जांच करेगी तो सच सामने आ जाएगा। वहीं, नई व्यवस्था के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों को कैंपस में आने वाली नैक टीम का पहले से पता नहीं चलेगा। फिलहाल नैक टीम के सदस्य छल प्रपंच करके सौ फीसदी वेटेज दे देते थे। नए नियम में इस वेटेज को 20 फीसदी तक करने की योजना है। 1 सितंबर से देशभर में वेटेज नीति को लागू करने की योजना है।