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तीन तलाक

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मुस्लिम महिलाओं के हक पर लगी मुहर
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कइयों के चेहरे खिले, कुछ को लग रही राजनीति
सरकार पर पेट्रोल की कीमतों से ध्यान भटकाने का भी आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने वाले अध्यादेश पर राष्ट्रपति की मुहर लग गई है। अब एक साथ तीन तलाक देना अपराध हो गया है। न्याय के लिए अदालत के दरवाजे पर पहुंचीं मुस्लिम महिलाओं को उनका हक मिला है। वह बहुत खुश हैं, हालांकि कई लोग इसे राजनीति से प्रेरित कदम बता रहे हैं। उनका कहना है कि पेट्रोल, डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। उससे ध्यान हटाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। अगर सरकार मुस्लिम महिलाओं के हित में काम करना चाहती है तो उनकी शिक्षा पर भी ध्यान दें।

इस्लाम में तलाक बुराई है। तीन तलाक देना अल्लाह को नागवार गुजरता है। कुछ लोग इसका फायदा उठाते हैं। लेकिन अब इस मुद्दे पर राजनीति की जा रही है। सरकार मुस्लिम महिलाओं को हक दिलाना चाहती है तो उनकी शिक्षा पर ध्यान दे। इससे महिलाओं का विकास होगा। महिलाओं पर होने वाली ज्यादती पर ध्यान दें।
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कारी फजलुर्रहमान, अध्यक्ष जमीयत उलेमा, नोएडा

इस्लाम में तीन तलाक एक साथ देना का प्रावधान नहीं है। लेकिन कुछ लोग तीन तलाक एक साथ दे रहे थे। तीन तलाक पर रोक मुस्लिम महिलाओं के लिए बहुत अच्छा कदम है। आजादी के इतने सालों बाद उन्हें हक मिल पाया है। जिन महिलाओं ने लड़ाई शुरू की थी, उन्हें सलाम है।
अहसान खान, भाजपा नोएडा महानगर अध्यक्ष, अल्पसंख्यक मोर्चा

बहुत अच्छा फैसला है। तीन साल की जेल सुनकर लोगों के मन में डर रहेगा और वो एक साथ तीन तलाक देने से बचेंगे। इससे केस भी कम होंगे। सही मायने में अब जाकर महिलाओं को न्याय मिल पाया है। अब झगड़े होने पर लोग तलाक की जगह आपस में बैठकर बात करने पर जोर देंगे।
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अब्दुल कादिर कासमी, जनरल सेक्रेटरी जमीयत ए उलेमा हिंद, नोएडा

तीन तलाक अमानवीय था। एक महिला तिनका - तिनका जोड़कर घर बनाती है। अचानक से तीन तलाक देकर उसे घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया जाता था। अन्य मुस्लिम देशों में एक साथ तीन तलाक नहीं दिया जाता है। लेकिन भारत में ऐसा हो रहा था। कानून बनने के बाद इस पर रोक लग सकेगी।
बिमला बाथम, उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष
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