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नोएडा के 26 मासूम नवजातों ने भरी सुनी माओं की कोख

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शहर में लावारिस मिले 26 बच्चों को लिया गोद
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कुछ साल में चाइल्ड लाइन की टीम को 29 बच्चे मिले
सभी एक -दो दिन के नवजात थे, 90 प्रतिशत लड़कियां
पीजीआई में भर्ती 3 बच्चियों को भी अडोप्शन सेंटर भेजा जाएगा

नेहा शर्मा
नोएडा। शहर में लावारिस मिले 26 नवजात को अडोप्शन सेंटर के जरिये नए मां-बाप मिल गए हैं। इन्हें देशभर की अलग-अलग जगहों से लोगों ने गोद लिया है। वहीं, ईएसआई और चाइल्ड पीजीआई अस्पताल में भर्ती 3 बच्चियों को भी जल्द ही अडोप्शन सेंटर भेजा जाएगा।
पिछले कुछ साल में चाइल्ड लाइन की टीम को नोएडा शहर में 29 बच्चे लावारिस मिले हैं। ये सभी एक -दो दिन के नवजात थे। इनमें 90 प्रतिशत लड़कियां थीं। नोएडा शहर में कई लोगों ने इनको गोद लेने के लिए हाथ बढ़ाए थे, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के चलते इनको मथुरा के अडोप्शन सेंटर भेजा गया। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों ने इन्हें गोद लेने के लिए आवेदन किया था।
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चाइल्ड लाइन को-ऑर्डिनेटर सत्यप्रकाश ने बताया कि अभी तक 29 बच्चे मिले हैं। इसमें 27 लड़कियां हैं। 26 बच्चों को अडोप्शन सेंटर भेजा गया था। वहां से उनको अडोप्ट किया जा चुका है। जिन लोगों को ये बच्चे मिले हैं, वह खुश हैं। तीन बच्चियां अभी भी ईएसआई और चाइल्ड पीजीआई अस्पताल में भर्ती हैं। उनके पेपर तैयार किए जा रहे हैं। ऑर्डर मिलते ही तुरंत इनको मथुरा के अडोप्शन सेंटर भेज दिया जाएगा।

नोएडा में भी जल्द खुलेगा अडोप्शन सेंटर
जिले में जल्द ही अडोप्शन सेंटर शुरू होने जा रहा है। इसके लिए शासन से अनुमति मिल गई है। यहां से 0 से 6 साल तक के बच्चों को गोद दिया जा सकेगा। इसके शुरू होने के बाद लावारिस मिलने वाले बच्चों को मथुरा के अडोप्शन सेंटर में भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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गोद लेने की प्रक्रिया
-पहले बच्चा एडोप्ट करने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
-आवेदक की पूरी वैरीफिकेशन की जाती है। आर्थिक स्थिति से लेकर बच्चा क्यों गोद ले रहे हैं, इसका कारण जाना जाता है।
-आवेदक को सभी स्थायी पते के साथ ही वर्तमान में निवास कर रहे हैं, पते का प्रमाणपत्र देना होता है।
-इच्छुक लोगों को अपना स्वास्थ्य प्रमाणपत्र भी देना पड़ता है।
-आवेदक बच्चे की जिम्मेदारी उठाने लायक हैं, इसकी जांच की जाती है।
-पूरी प्रक्रिया होने के बाद एजेंसी से फोन आता है, तब एडोप्शन सेंटर में जाकर बच्चे को ले सकते हैं।
-जरूरत पड़ने पर कोर्ट भी हस्तक्षेप करता है, बच्चा गोद लेने के बाद निगरानी की जाती है।

लड़कियों के प्रति उदासीन रवैया
अभी तक जितने बच्चों को छोड़ा गया है, उसमें लड़कियों की संख्या ज्यादा है। लड़कियों के प्रति लोगों का रवैया अभी भी उदासीन है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार ,वर्ष 2008-09 में कुल 35496 बच्चों ने जन्म लिया। इसमें लड़के 19216 और लड़कियों की संख्या 16280 थी। यानी लड़का और लड़की का अनुपात 54:46 था। वर्ष 2016-17 में कुल 42506 बच्चों ने जन्म लिया था। इसमें लड़कों की संख्या 22711 और लड़कियों की संख्या 19795 थी यानी लड़कों और लड़कियों का अनुपात 53:47 रहा है। इतने सालों में लड़कियों की संख्या में मात्र 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

कब-कब बच्चियों को छोड़ा
-10 दिन पहले एक मां ने ईएसआई अस्पताल के बाथरूम में बच्ची को छोड़ दिया था।
-दो महीने पहले जिला अस्पताल के शौचालय में एक महिला भ्रूण छोड़कर चली गई थी।
-9 महीने पहले सेक्टर-24 स्थित ईएसआई अस्पताल में एक महिला लड़की होने पर उसे अस्पताल में छोड़कर चली गई थी।
-डेढ़ साल पहले एक महिला बरौला में झाड़ियों में बच्ची को फेंककर चली गई थी।


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