सोनभद्र। अक्तूबर के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश होने और उसके बाद तापमान गिरने से बिजली की मांग पर खासा असर पड़ा है। सितंबर के मुकाबले मांग में 12 हजार मेगावाट की गिरावट आने से दीपावली बीतते ही 17 बिजली इकाइयां 25 अक्तूबर तक के लिए बंद कर दी गई हैं। उधर, ओबरा परियोजना की एक इकाई बॉयलर ट्यूब में लीकेज के कारण बंद पड़ी है। प्रदेश को सबसे सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के बावजूद मांग में कमी को देखते हुए लैंको और ओबरा परियोजना से लगभग 1200 मेगावाट की थर्मल बैकिंग की जा रही है।
पिछले साल दीपावली पर अधिकतम मांग 23 हजार मेगावाट के करीब दर्ज की गई थी। वहीं, इस बार 20 हजार मेगावाट के करीब मांग बनी रही। इसके बाद यह मांग 18 से 19 हजार मेगावाट पर आ गई। बुधवार की रात पीक ऑवर में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिली और अधिकतम मांग 20319 मेगावाट पर जा पहुंची। पिछले महीने हुई बिजली की अधिकतम खपत के मुकाबले लगभग 12 हजार मेगावाट की गिरावट आने पर उतरौला की दो, बरखेड़ा की दो, खंबरखेड़ा की दो, कुंडारखी की दो और मकसूदपुर की दो इकाइयां बंद कर दी गई हैं। वहीं, तीन अक्तूबर से बंद चल रहीं हरदुआगंज की तीन, जवाहरपुर की दो और पारीक्षा की दो इकाइयों को 25 अक्तूबर तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है। इनमें चार ऐसी इकाइयां भी शामिल हैं, जिन्हें दीप पर्व पर बिजली की अच्छी मांग की संभावना को देखते हुए उत्पादन पर लिया गया था।
ओबरा की बंद नौवीं इकाई को चालू करने का प्रयास जारी
200 मेगावाट क्षमता की ओबरा परियोजना की नौवीं इकाई बुधवार की दोपहर में करीब तीन बजे बॉयलर ट्यूब में लीकेज के कारण बंद हो गई थी। इससे 1000 मेगावाट क्षमता वाली ओबरा बी तापीय परियोजना का उत्पादन लुढ़ककर 560 मेगावाट पर आ गया है। सीजीएम आरके अग्रवाल के मुताबिक बंद इकाई को चालू करने का प्रयास किया जा रहा है।